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कूनो नेशनल पार्क की टीम चीता खोजने निकली थी, ग्रामीणों ने डकैत समझ कर हमला कर दिया, जानें पूरा मामला

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: May 26, 2023 15:04 IST

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कूनो नेशनल पार्क की एक टीम पर ग्रामीणों ने लाठी डंडे से हमला बोल दिया। ये टीम संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकली मादा चीता आशा का पता लगाने निकली थी।

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ठळक मुद्देकूनो नेशनल पार्क लगातार सुर्खियों में बना हुआ हैकूनो नेशनल पार्क की एक टीम पर ग्रामीणों ने लाठी डंडे से हमला बोलाचीते की खोज में निकली टीम के ग्रामीणों ने डकैत समझा

भोपाल: मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। गुरुवार, 25 मई को मादा चीता ज्वाला के 2 और शावक की मौत हो गई थी। मंगलवार को भी एक शावक की मौत हुई थी। अब खबर आई  है कि मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कूनो नेशनल पार्क की एक टीम पर ग्रामीणों ने लाठी डंडे से हमला बोल दिया। ये टीम संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकली मादा चीता आशा का पता लगाने निकली थी। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीणों ने  मादा चीता आशा का पता लगाने निकली टीम को पशु चोरी करने वाली डकैतों की टोली समझा था। ग्रामीणों ने दल को डकैत समझकर उन पर गोलियां चला दीं और हमला कर दिया।

पथराव और मारपीट में वन विभाग के चार कर्मचारी घायल हो गए। बाद में पोहरी अस्पताल में उनका इलाज किया गया। वन विभाग की चीता ट्रेकिंग टीम चीता की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उसकी गर्दन से जुड़े जीपीएस ट्रैकर का इस्तेमाल कर रही थी। तलाशी के दौरान टीम रात के समय बुराखेड़ा गांव के पास से गुजरी। टीम को इस इलाके में मादा चीता के होने के निशान मिले थे।

अंधेरे में टीम की उपस्थिति को ग्रामीणों ने डकैतों की मौजूदगी माना। इसके बाद उन्हें डराने के लिए हवा में चेतावनी के शॉट दागे। इसके बाद जब टीम पीछे नहीं हटी तब ग्रामीणों ने पथराव किया और लाठी-डंडे से हमला कर दिया। घटना के दौरान वन विभाग के वाहन को भी नुकसान पहुंचा है। हाल ही में इस इलाके में पशु चोरों की मौजूदगी रही है और ऐसी कई घटनाएं होने के बाद ग्रामीण आशंकित रहते हैं।

बता दें कि इससे पहले कूनो में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला  24 मार्च को  4 शावकों को जन्म दिया था। 23 मई को पहले शावक की मौत हो गई थी। इसके बाद चिलचिलाती गर्मी के बीच मादा चीता ज्वाला के दो और शावकों ने दम तोड़ दिया। कूनो में अब तक 6 चीतों की मौत हो चुकी है। प्रोजेक्ट चीता को ये झटका लगने की तरह है। शावकों की मौत ने भारत में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

हालांकि विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ऐसे मामले अभी बढ़ सकते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स ने  दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञ विंसेट वान डेर मर्व के माध्यम से बताया है कि संभावना है कि मृत्यु दर पहले वर्ष में 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। उनके अनुसार, चीतों को फिर से बसाए जाने की परियोजना के दौरान आगामी कुछ महीनों में तब और मौत होने की आशंका है, जब चीते कूनो नेशनल पार्क में अपने क्षेत्र स्थापित करने की कोशिश करेंगे और तेंदुओं एवं बाघों से उनका सामना होगा।

टॅग्स :मध्य प्रदेशभोपालForest Departmentफोरेस्ट गार्ड
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