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तमिलनाडु: एआईएडीएमके ने कहा, "भाजपा का शीर्ष नेतृत्व 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए करना चाहता है गठबंधन"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: July 12, 2023 15:11 IST

एआईएडीएमके ने कहा कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि वह एनडीए के खेमे शामिल होकर पार्टी के दक्षिण भारत में मजबूत धरातल प्रदान करे।

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ठळक मुद्देएआईएडीएमके ने कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को दक्षिण भारत में हमसे है उम्मीद यही कारण है कि भाजपा ने 18 जुलाई को होने वाली एनडीए की बैठक में पार्टी को आमंत्रित किया हैभाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पता है कि बिना एआईएडीएमके वह अपने दम पर सीट नहीं जीत सकता है

चेन्नई: भारतीय जनता पार्टी 2024 के आम चुनाव को लेकर दक्षिण भारत में प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करना चाहती है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिली हार के झटके उबरने का प्रयास करती हुई भाजपा की उम्मीदे तमिलनाडु से लग गई है। खबरों के मुताबिक तमिलनाडु का सत्ताधारी दल डीएमके और उसके मुखिया एमके स्टालिन से मिल रही चुनौती का मुकाबला करने के लिए भाजपा किसी भी कीमत पर विपक्षी दल एआईएडीएमके को अपने पाले में करने की कवायद में जुटा हुआ है।

इस संबंध में एआईएडीएमके नेताओं का कहना है कि भले ही तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई बार-बार अन्नाद्रमुक पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि एआईएडीएमके एनडीए के खेमे शामिल होकर पार्टी के दक्षिण में मजबूत धरातल प्रदान करे।

खबरों के अनुसार भाजपा ने 18 जुलाई को नई दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक में भाग लेने के लिए एआईएडीएमके महासचिव और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी को निमंत्रण भेजा है। इस कारण से पार्टी का मानना है कि भाजपा एआईएडीएमके को अपने पाले में लाने के लिए बेहद उत्सुक है।

इससे पूर्व दक्षिण भारत और खासकर तमिलनाडु में ऐसी खबरें चल रही थीं कि भाजपा तमिलनाडु में 2024 के आम चुनाव में अकेले लड़ने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि समाचार एजेंसी आईएएनएस ने इस संबंध में भाजपा सूत्रों के हवाले से बताया है कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने तमिलनाडु में पार्टी की संभावनाओं पर एक विस्तृत सर्वेक्षण कराया था, जिसमें साफ संकेत मिले हैं कि भाजपा अन्नाद्रमुक के बिना अपने दम पर कोई भी सीट नहीं जीत सकती है।

मालूम हो कि बीते पिछले पांच दशकों से तमिलनाडु की सियासत डीएमके बनाम एआईएडीएम के इर्द-गिर्द घूमती रही है और दोनों दलों ने अपने-अपने बल पर कांग्रेस के अभेद्य माने जाने वाले तमिलनाडु से उसे दूर कर दिया था। कांग्रेस बिना द्रविड़ समर्थन के तमिलनाडु की राजनीतिक में कुछ नहीं रह गई थी। यही कारण है कि भाजपा भी तमिलनाडु की राजनीतिक बारीकियों को समझते हुए किसी भी तरह का खतरा नहीं उठाना चाहती है।

भाजपा भी इस बात को बखूबी समझ रही है कि तमिलनाडु में बिना एआईएडीएमके के उसे राज्य में कभी उचित मान्यता नहीं मिलेगी और वो बिना द्रविड़ समर्थन के कुछ भी नहीं कर पाएगी।

मदुरै के राजनीतिक विश्लेषक और राजनीति विज्ञान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आर. कल्याणसुंदरम ने तमिलनाडु में भाजपा की राजनीति पर कहा, “भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई एआईएडीएमके के खिलाफ बोलकर राजनीतिक आत्महत्या कर रहे है क्योंकि तमिलनाडु की राजनीतिक को समझने वाले इस बात तो अच्छे से जानते हैं कि भाजपा के लिए तमिलनाडु में लाभ पाने का एकमात्र समाधान एआईएडीएमके है।”

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