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जानिए कौन हैं वो 3 अहम लोग जो करेंगे राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मध्यस्थता, 8 हफ्ते में सौंपनी है रिपोर्ट

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 8, 2019 11:55 IST

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने राम जन्मभूमि विवाद सुलझाने के लिए श्री श्री रविशंकर, जस्टिस इब्राहिम ख़लीफुल्लाह और सीनियर एडवोकेट श्री राम पंचू को मध्यस्थता के लिए नियुक्त किया है।

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट ने इसकी मीडिया रिपोर्टिंग पर भी रोक लगा दी है।पीठ ने कहा कि मध्यस्थता की सारी प्रक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड होगी। इसे फैजाबाद में आयोजित किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के लिए मध्यस्थता से समाधान निकालने का आदेश दिया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरुवार (8 मार्च) को फैसला सुनाया। कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता में तीन नाम गठित कर दिया है।  जिसमें धर्मगुरु श्री श्री रविशंकर, जस्टिस इब्राहिम ख़लीफुल्लाह और सीनियर एडवोकेट श्री राम पंचू शामिल हैं। पीठ ने कहा कि आठ हफ्ते में मध्यस्थों की अपनी पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी होगी। 

अयोध्या केस में मध्यस्थता करने वाले लोगों के बारे में -  

श्री श्री रविशंकर

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक के संस्थापक है। श्री श्री रविशंकर प्रसाद राम मंदिर पर पहले भी अपने विचार रख चुके हैं। श्री श्री रविशंकर प्रसाद का जन्म 1956 में दक्षिण भारत में हुआ था। इन्होंने चार वर्ष की आयु से ही वे भगवद्गीता, जोकि एक प्राचीन संस्कृत में लिखा धर्मग्रन्थ है, उसका व्याख्यान कर लेते थे। उनके पहले गुरु श्री सुधाकर चतुर्वेदी थे, जिनका महात्मा गाँधी के साथ बहुत लम्बा सहयोग रहा था। उन्होंने वैदिक साहित्य और भौतिक विज्ञान, दोनों में डिग्री प्राप्त की है।

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जस्टिस एफएम ख़लीफुल्लाह

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के लिए मध्यस्थता से समाधान निकालनेल के  लिए जस्टिस इब्राहिम ख़लीफुल्लाह का नाम दिया है। फकीर मोहम्मद इब्राहिम ख़लीफुल्लाह का जन्म 23 जुलाई 1951 में तमिल नाडु के कराइकुडी शिवगंगई जिला में हुआ था। 

कालीफुल्ला ने सबसे पहले 20 अगस्त 1975 को एक वकील के रूप में दाखिला लिया था। 2 फरवरी 2011 में कलीफुल्लाह मद्रास हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किए गए।  फरवरी 2011 में, वह जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय के सदस्य बने और उन्हें दो महीने बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।  2 अप्रैल 2012 को, उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय में नामित किया गया, मुख्य न्यायाधीश सरोश होमी कपाड़िया ने शपथ ली। जस्टिस कलीफुल्ला 22 जुलाई 2016 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए।

अगर मध्यस्थता से भी नहीं निकला राम मंदिर मुद्दे का समाधान तो बीजेपी के पास है 'बैक-अप प्लान' एडवोकेट श्रीराम पंचू 

श्री राम पंचू एक वरिष्ठ एवोकेट हैं जो पिछले 40 सालों से लॉ प्रेक्टिस कर रहे हैं। इसके साथ ही श्री पंचू एक सक्रिय मध्यस्थ के रूप में भी जाने जाते हैं।  वह कॉनकॉर्ड मध्यस्थता के संस्थापक हैं, जो मध्यस्थता और मध्यस्थता में सेवाएं प्रदान करता है। वह नेशनल एसोसिएशन मिडिएटर्स इंडिया के अध्यक्ष हैं।उन्होंने 2005 में भारत की पहली अदालत - मध्यस्थता केंद्र की स्थापना की, और न्यायाधीशों और वकीलों के साथ काम करके मध्यस्थता को भारत की कानूनी प्रणाली का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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