लाइव न्यूज़ :

पदोन्नति में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, अपर्याप्त प्रतिनिधित्व हो सकता है आरक्षण का आधार

By भाषा | Updated: August 31, 2018 05:45 IST

अजा,अजजा संवैधानिक रूप से पिछड़े, अपर्याप्त प्रतिनिधित्व हो सकता है आरक्षण का आधार: न्यायालय

Open in App

नई दिल्ली, 31 अगस्तः उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण देते वक्त उनके पिछड़ेपन के बजाय सरकारी नौकरियों में उनके अपर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसे कारकों पर विचार किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि अजा,अजजा समुदायों के सदस्यों को संवैधानिक रूप से पिछड़ा माना जाता है। 

ये टिप्पणियां प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कीं। पीठ ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख दिया जिसमें अनुसूचित जाति-जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण पर शर्तें लगाने वाले उसके 2006 के एम नागराज मामले के निर्णय पर सात सदस्यीय पीठ द्वारा पुनर्विचार की मांग की गई थी। 

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2006 में एम नागराज प्रकरण में अपने फैसले में कहा था कि राज्य इन समुदायों के सदस्यों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने से पहले सरकारी नौकरियों में इनके अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के बारे में तथ्य, कुल प्रशासनिक क्षमता, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के पिछड़ेपन से जुड़ा आंकड़ा उपलब्ध कराने के लिये बाध्य हैं।

केन्द्र और विभिन्न राज्य सरकारों ने भी कई आधारों पर संविधान पीठ के निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। इसमें एक आधार यह भी है कि अजा-अजजा के सदस्यों को पिछड़ा माना जाता है और उनकी जाति के ठप्पे को देखते हुये उन्हें नौकरी में पदोन्नति में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘अन्य कमजोर वर्ग और अजा, अजजा वर्ग के बीच अंतर है। पिछड़ेपन की जांच उन कमजोर वर्गों के लिए है जो अजा, अजजा नहीं हैं। जहां तक अजा, अजजा वर्ग की बात है, वे संवैधानिक रूप से पिछड़े हैं।’’ 

पीठ ने कहा कि जहां तक अजा, अजजा वर्ग की बात है, पिछड़ेपन की संकल्पना का ज्यादा महत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि 2006 के फैसले ने सरकारी नौकरियों में अजा, अजजा वर्गों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व संबंधी आंकड़े के महत्व का जिक्र किया था।

पीठ ने ये टिप्पणियां उस समय कीं जब वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने उच्च पदों में पदोन्नति में आरक्षण को मंजूरी का विरोध किया और कहा, ‘‘बैसाखियां हमेशा के लिए नहीं हैं और बैसाखियां सबके लिए नहीं हैं। (अजा, अजजा की) जिन पीढियों को दबाया गया वे जा चुकी हैं और जिन पीढियों ने उन्हें दबाया वे भी जा चुकी हैं।’’ 

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टआरक्षणआरबीआई
Open in App

संबंधित खबरें

भारतअल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड केस से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन, आखिर कारण

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

कारोबारBank Holiday Today: घर से निकलने से पहले चेक कर लें बैंक हॉलिडे लिस्ट, बस एक क्लिक से जानें आज बैंक बंद या खुले?

भारत7 न्यायिक अधिकारी और 9 घंटे तक बंधक?, मतदाता सूची से नाम हटाने पर बवाल, सीजीआई सूर्यकांत ने कहा-रात 2 बजे से निगरानी कर रहा?

कारोबारBank Holiday Today: 1 अप्रैल को बैंक जाने की गलती न करें, बंद रहेंगे पब्लिक विंडो; जानें क्या है कारण

भारत अधिक खबरें

भारतLPG Cylinder Update: सिलेंडर के लिए अब लंबी वेटिंग खत्म! दिल्ली में बस ID कार्ड दिखाओ और 5KG सिलेंडर पाओ

भारतबाबा विश्वनाथ और ‘काशी कोतवाल’ काल भैरव में दर्शन-पूजन, सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंचे मंदिर, वीडियो

भारतपश्चिम बंगाल चुनावः 4660 अतिरिक्त मतदान केंद्र?, कुल संख्या 85379 और 23 और 29 अप्रैल को 2 चरणों में पड़ेंगे वोट

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"

भारतFire Accident: ONGC मुंबई हाई प्लेटफॉर्म पर भीषण आग, 10 लोग घायल; राहत और बचाव कार्य जारी