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अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की 'अटूट' दोस्ती की कहानी

By सुवासित दत्त | Updated: August 16, 2018 17:40 IST

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की दोस्ती की शुरुआत साल 1950 से हुई थी।

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कहते हैं कि राजनीति में कोई नियमित 'दोस्त' या 'दुश्मन' नहीं होता। राजनीति में परिस्थिति को देखते हुए 'दोस्त' और 'दुश्मन' का चुनाव किया जाता है। लेकिन, इसी भारतीय राजनीति में दोस्ती की एक ऐसी भी कहानी है जो बीते कई सालों से चली आ रही है। ये कहानी है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बीजेपी के फायरब्रांड नेता रहे लालकृष्ण आडवाणी की 'अटूट' दोस्ती की। 

जनसंघ के दिनों से लेकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना तक अटल बिहारी और लालकृष्ण आडवाणी हर स्थिति में एक साथ रहे और पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहे। साल 2002 से लेकर साल 2004 तक वाजपेयी सरकार में लालकृष्ण आडवाणी डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बनकर वाजपेयी के कदम से कदम मिलाकर चलते रहे। 

इन दोनों की दोस्ती की कहानी साल 1950 से शुरू हुई थी। इन दोनों ने भारतीय जनसंघ की स्थापना में अहम भूमिका अदा की थी। बाद में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की भी जिम्मेदारी इन दोनों के कंधे पर ही थी। साल 1977 में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा था। इमरजेंसी के बाद 1975-77 में जनता पार्टी ने कई अलग अलग पार्टियों के साथ मिलकर केंद्र में सरकार भी बनाई थी।

कई मुद्दों पर अलग अलग विचार होने के बावजूद अटल बिहारी और आडवाणी के बीच गज़ब का तालमेल था। लालकृष्ण आडवाणी भी वाजपेयी के साथ दोस्ती के बारे में खुल कर बात करते थे। एक टीवी इंटरव्यू में आडवाणी ने बताया था कि जब अटल बिहारी के नेतृत्व में केंद्र में बीजेपी की सरकार थी तो पार्टी या सरकार से जुडी किसी भी समस्या को लेकर लोग वाजपेयी के पास जाते थे तो उनका जवाब होता था 'एक बार आडवाणी जी से बात कर लो'। ये बताता है कि वाजपेयी का आडवाणी पर 'अटल' विश्वास था।

अपनी युवा अवस्था को याद करते हुए एक दूसरे इंटरव्यू में लालकृष्ण आडवाणी ने बताया था, 'मैं और अटल जी एक स्कूटर पर चाट और गोलगप्पे खाने जाते थे। हम दोनों फिल्म देखने भी साथ जाते थे। इस दौरान मैं स्कूटर चलाता था और वाजपेयी जी पीछे बैठते थे।' अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपनी दोस्ती के बारे में आडवाणी ने कई मौके पर बात की है।

लेकिन, वक्त के साथ कौन जीत पाया है। आज अटल बिहारी वाजपेयी की मौत के बाद इस 'अटूट' दोस्ती का अंत हो चुका है। उम्र और बीमारी से एक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस दुनिया को 93 साल की उम्र में अलविदा कह चुके हैं। लेकिन, भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की दोस्ती सदियों तक याद रखी जाएगी।

टॅग्स :अटल बिहारी वाजपेयीएल के अडवाणीएनडीए सरकारभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
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