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Delhi Violence Taja Samachar: एसएन श्रीवास्तव बोले- 300 मामले दर्ज, अफवाह ना फैलाएं, शांति भंग ना करें 

By भाषा | Updated: March 2, 2020 20:59 IST

दिल्ली पुलिस के कार्यवाहक आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ हम सोशल मीडिया पर इन अफवाहों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि अफवाह फैलाने के संबंध में छह मामले दर्ज किए गए हैं और जांच जारी है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा पर दिल्ली पुलिस आयुक्त एस.एन. श्रीवास्तव ने कहा कि हमने 300 से अधिक मामले दर्ज किए हैं।

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ठळक मुद्देकड़ी सुरक्षा के बीच विद्यार्थियों ने दी बोर्ड परीक्षा, पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों पर भी की कार्रवाई।‘‘ हम सोशल मीडिया पर इन अफवाहों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं।’’

दिल्ली पुलिस के कार्यवाहक आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने सोमवार को लोगों से अपील की कि राष्ट्रीय राजधानी में अफवाह न फैलाएं, सांप्रदायिक सौहार्द और शांति भंग न करें।

राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को कई स्थानों पर हिंसा की अफवाह फैलने के बाद लोगों के बीच दहशत पैदा होने के उपरांत उनका यह बयान आया है। पुलिस आयुक्त ने लोगों से अफवाह के बारे में दिल्ली पुलिस नियंत्रण कक्ष से जानकारी हासिल करने को भी कहा।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ हम सोशल मीडिया पर इन अफवाहों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि अफवाह फैलाने के संबंध में छह मामले दर्ज किए गए हैं और जांच जारी है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा पर दिल्ली पुलिस आयुक्त एस.एन. श्रीवास्तव ने कहा कि हमने 300 से अधिक मामले दर्ज किए हैं।

उत्तरपूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्रों के ज्यादातर विद्यार्थियों ने सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण रही। पुलिस ने बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के किसी भी इलाके से पिछले पांच दिनों में हिंसा की कोई सूचना नहीं है।

जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, चांद बाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार और मुस्तफाबाद में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हिंसा के संबंध में अफवाह फैलाने के आरोप में 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीबीएसई ने बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के हिंसा प्रभावित इलाकों में 98 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थियों ने सोमवार को अपनी बोर्ड परीक्षाएं दीं। इससे पहले सीबीएसई ने उत्तर पूर्वी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर 29 फरवरी तक बोर्ड परीक्षा स्थगित कर दी थी।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2,888 विद्यार्थियों में से भौतिकी और संगीत की परीक्षा में 2,837 विद्यार्थी उपस्थित हुए। उपराज्यपाल अनिल बैजल और पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने हालात का जायजा लेने के लिए सोमवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। राय ने मुस्तफाबाद में दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए राहत शिविर का भी दौरा किया। इस शिविर में 1,000 लोगों को रखने की व्यवस्था है। आप सरकार ने उत्तरपूर्वी दिल्ली में पीड़ितों के लिए नौ राहत शिविर बनाए हैं। राय ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो और राहत शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि पुलिस ने कुछ ‘निर्दोष’ लोगों को भी गिरफ्तार किया है।

वहीं सांप्रदायिक हिंसा से पीड़ित कई लोगों के घर समेत दस्तावेज भी बर्बाद हो जाने से उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे दिल्ली सरकार से मुआवजे की मांग किस आधार पर करें। हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक मुस्तफाबाद में अल-हिंद अस्पताल के एक राहत शिविर में ऐसे कई परिवारों के मन में यही प्रश्न उठ रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से अपील की है कि वह जरूरतमंद लोगों की जानकारी मुहैया कराएं ताकि सरकारी एजेंसियां जल्द से जल्द मदद कर पाए।

केजरीवाल ने सांप्रदायिक दंगों के दौरान जान गंवाने वाले खुफिया ब्यूरो के कर्मी अंकित शर्मा के परिवार को सोमवार को एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की। अंकित के परिवार को सरकारी नौकरी भी मिलेगी। प्रभावित क्षेत्रों में कई जगहों पर लोग अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर हैं क्योंकि उनके घरों के बाहर बिजली आपूर्ति लाइन अब भी क्षतिग्रस्त है। बीएसएफ ने सोमवार को अपने जवान मोहम्मद अनीस को 10 लाख रुपये का चेक सौंपा। अनीस के घर में तोड़फोड़ की गई थी और आग लगा दी गई थी।

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सौहार्द समिति ने सोमवार को पहली बैठक की और यह निर्णय लिया कि वह लोगों में इस बात को लेकर जागरुकता फैलाएंगे कि फर्जी खबर के प्रसार से तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसी बीच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सोमवार को केंद्र और दिल्ली सरकार की आलोचना की। इनका आरोप है कि केंद्र और दिल्ली सरकार हिंसा प्रभावित लोगों को ईलाज और कानूनी सहायता पहुंचाने में विफल रहे। 

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