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सिद्धू ने कोटकपूरा पुलिस गोलीबारी की घटना की जांच को लेकर पंजाब सरकार से सवाल किये

By भाषा | Updated: November 8, 2021 20:28 IST

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चंडीगढ़, आठ नवंबर कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को राज्य में अपनी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या वह 2015 कोटकपूरा पुलिस गोलीबारी की घटना के पीड़ितों को न्याय दिलाएगी या दोषियों की ‘ढाल’ बनकर उनके साथ खड़ी होगी।

सिद्धू ने यहां मीडिया को संबोधित करते हुए यह भी पूछा कि घटना में आरोप पत्र कहां है।

उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि कोटकपूरा गोलीबारी की घटना की जांच छह महीने के भीतर पूरी कर ली जानी चाहिए। उन्होंने पूछा, ‘‘आज छह महीने और एक दिन बीत गया। (मामले में) आरोप पत्र कहां है।’’

उन्होंने यह भी पूछा कि गोलीबारी की घटना के एक आरोपी पूर्व पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी को मिली जमानत के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका क्यों नहीं दायर की गई ?

उच्च न्यायालय ने अप्रैल में पंजाब पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा 2015 कोटकपूरा में सिख प्रदर्शनकारियों की एक सभा में हुई गोलीबारी संबंधी घटना की जांच को रद्द कर दिया था। सिख प्रदर्शनकारी उस वर्ष फरीदकोट में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।

अदालत ने तत्कालीन आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह की अध्यक्षता वाली एसआईटी जांच को रद्द कर दिया था। बाद में उन्होंने समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली थी।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सात मई को नई एसआईटी का गठन किया गया था। कोटकपूरा गोलीबारी की घटना की जांच के लिए नई एसआईटी का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एल के यादव ने किया।

राज्य में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं और इसके बाद 2015 में फरीदकोट में इस मुद्दे पर विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस गोलीबारी से संबंधित घटनाएं हुई थी। पुलिस गोलीबारी की एक घटना कोटकपूरा में और दूसरी फरीदकोट के बहबल कलां में हुई थी।

सिद्धू राज्य के महाधिवक्ता ए पी एस देओल और कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक आई पी एस सहोता की नियुक्ति का विरोध करते रहे हैं।

कोटकपूरा की घटना के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि वह छह महीने और एक दिन बीतने के बाद इस मुद्दे को उठा रहे है, और राज्य के महाधिवक्ता (एजी), ए पी एस देओल और कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आई पी एस सहोता की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने राज्य में चरणजीत सिंह चन्नी सरकार के स्पष्ट संदर्भ में पूछा, “आपकी नियुक्तियों में फिर से गड़बड़ी हुई है। चाहे आप (यहां) न्याय देने वाले हों या दोषियों की ढाल बनकर उनके साथ खड़े हों। क्या इसका कोई जवाब है?’’

नशीले पदार्थों पर एक विशेष कार्यबल की रिपोर्ट पर, सिद्धू ने राज्य सरकार से पूछा कि रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से किसने रोका और उन्होंने ‘‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’’ की आवश्यकता पर जोर दिया।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सिद्धू जहां हैं वहीं खड़े हैं। जो बदल गए हैं, उन्हें अपना रूख साफ करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार द्वारा कोई अच्छा काम किया जाता है तो वह सराहना करते हैं और उन्होंने इसके द्वारा ईंधन की कीमतों में कमी का उल्लेख किया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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