Shia Central Waqf Board Chairman Waseem Rizvi says Ayodhya and there can never be a Masjid | अयोध्या केस: शिया वक्फ बोर्ड चाहता है बने राम मंदिर, राजीव धवन ने कहा- हिन्दू तालिबान ने गिराई मस्जिद

लखनऊ, 13 जुलाई: उत्तर प्रदेश के शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। इस बार चेयरमैन वसीम रिजवी ने अयोध्या विवाद को लेकर बयान दिया है। चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा, मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि अयोध्या में मोदी और योगी सरकार में राम मंदिर ही बनेगा। शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विवाद को सुलझाना चाहते हैं। बोर्ड ने साफ कहा कि बाबरी मस्जिद का संरक्षक एक शिया था और इसलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड या कोई और भारत में मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हैं। 

चेयरमैन वसीम रिजवी ने यह भी कहा, मोदी और योगी सरकार में बाबर और बाबरी के पैरोकारों की हार पूरी तरह से तय है। अपने बयान में एक तरफ उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर अपना समर्थन दिया। वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूपी के सीएम योगी जी की कार्यप्रणाली पर अपना भरोसा जताया है। 


शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा, बाबर के जमाने में राम मंदिरों को तोड़ा गया था अब वो दूबारा बन पाएगे। उन्होंने कहा अयोध्या में न तो कभी मस्जिद थी और न है और न कभी वहां मस्जिद बन पाएगी। क्योंकि वह रामजन्म भूमि है इसलिए वहां राम मंदिर ही बनना चाहिए।


वहीं, मुसलमानों और सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पेश सीनियर ऐडवोकेट  राजीव धवन ने अयोध्या मामले पर कहा,  'शिया वक्फ बोर्ड के पास इस मामले में बात करने के लिए कोई सबूत नहीं है। उन्होंने कहा, बामियान बुद्ध की मूर्तियों को मुस्लिम तालिबान ने नष्ट किया था और बाबरी मस्जिद को हिंदू तालिबान की ओर से ध्वस्त किया गया।''



गौरतलब है कि इससे पहले भी वसीम रिजवी ने कई बार मुस्लमानों पर निशाना साधा है। रिजवी ने हाल ही में एक फतवा जारी किया था और इस्लामिक आतंकवाद पर अपना बयान दिया था, जो कि विवादों में घिर गया था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर भूमि विवाद पर जारी सुनवाई में मुस्लिम पक्षों की दलीलें चल रही हैं। इससे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए नजीर की विशेष पीठ ने 17 मई को हिंदू संगठनों की तरफ से पेश दलीलें सुनी थीं।  

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