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सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट का फिलहाल कोई आदेश सुनाने से इनकार, कहा- ये भावनात्मक मुद्दा

By विनीत कुमार | Updated: December 13, 2019 13:08 IST

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के लिए महिला कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने के लिए केरल सरकार को आदेश देने से इनकार कर दिया।

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ठळक मुद्देदो महिला कार्यकर्ताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई फैसला देने से इनकार कियाकोर्ट ने कहा कि सभी पुनर्विचार याचिकाओं को बड़ी बेंच को भेजा गया है, ऐसे में अभी कोई फैसला देना ठीक नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट ने दो महिलाओं की ओर से दायर याचिका पर फिलहाल कोई फैसला सुनाने से इनकार कर दिया है। इन महिलाओं ने अपनी याचिका में केरल में स्थित सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने कहा कि पहले ही मामले को बड़ी बेंच को भेजा गया है और ऐसे में अभी कोई फैसला देना ठीक नहीं होगा।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में प्रवेश के लिए महिला कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने के लिए केरल सरकार को आदेश देने से भी इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा 'काफी भावोत्तेजक' है और वह नहीं चाहता कि स्थिति 'विस्फोटक' हो जाए।

मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, 'सबरीमाला में एक फैसला (महिलाओं के मंदिर में प्रवेश) दिया गया है लेकिन साथ ही ये भी सही है कि मामले को बड़ी बेच को भेजा गया है। सबरीमला का मामला भावनात्मक मुद्दा है, हम स्थिति को भड़काना नहीं चाहते हैं।'

कोर्ट ने बिंदु अम्मानी और रेहाना फातिमा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, 'ये बहुत पुरानी परंपरा है जो हजारों साल से चली आ रही है। सुविधा में संतुलन जरूरी है ताकि अभी कोई फैसला आपके पक्ष में नहीं चला जाए। अभी मुद्दे पर विचार जारी है और अगर ये आपके पक्ष में आता है तो हम निश्चित तौर पर आपकी रक्षा करेंगे।'

कोर्ट ने कहा कि वह मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई के लिए वृहद पीठ गठित करेगा। पीठ में जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाले 28 सितंबर 2018 के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई गई है लेकिन 'यह भी सच है कि यह अंतिम फैसला नहीं है।'

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