लाइव न्यूज़ :

धर्म संसद में जो कहा गया वह हिंदुत्व नहीं, लोकमत के कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 7, 2022 08:06 IST

मोहन भागवत ने लोकमत के नागपुर संस्करण के स्वर्ण महोत्सव के निमित्त 'हिंदुत्व और राष्ट्रीय एकता' विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में हाल में धर्म संसद में हुई बयानबाजी पर अफनी बात रखी है।

Open in App
ठळक मुद्देलोकमत के नागपुर संस्करण के स्वर्ण महोत्सव के तहत 'हिंदुत्व और राष्ट्रीय एकता' विषय पर आयोजित व्याख्या में बोले मोहन भागवतमोहन भागवत ने कहा कि धर्म संसद में हिंदुत्व के नाम पर अतिवादी लोग बोल रहे थे।मोहन भागवत ने कहा कि कुछ हिंदुत्ववादी आज जिसे हिंदुत्व मान रहे हैं, वह असल में ऐसा नहीं है।

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हरिद्वार और अन्य स्थानों पर हुई धर्म संसद में हुई बयानबाजी पर पहली बार सार्वजनिक रूप से कुछ कहा है। मोहन भागवत ने इस दौरान कहा कि धर्म संसद में जो कहा गया वह हिंदुत्व नहीं है। 

भागवत रविवार को लोकमत के नागपुर संस्करण के स्वर्ण महोत्सव के निमित्त 'हिंदुत्व और राष्ट्रीय एकता' विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म संसद में हिंदुत्व के नाम पर अतिवादी लोग बोल रहे थे, वह हिंदुत्व बिल्कुल नहीं है। ऐसे बयान अनुचित हैं। भागवत ने कहा कि कुछ हिंदुत्ववादी आज जिसे हिंदुत्व मान रहे हैं, हकीकत में वह ऐसा नहीं है।

धर्म के नाम पर देश तोड़ने की षड्यंत्र

भागवत ने कहा कि हिंदुत्व में जाति, पंथ मतभेद का स्थान नहीं है। अंग्रेजों को मालूम था कि सभी को जोड़ने वाले विचार को अगर भुला दिया गया तो देश टूटेगा। उन्होंने ऐसा ही करने का प्रयास भी किया। आज भी धर्म के नाम पर देश को तोड़ने का षड्यंत्र आरंभ है। मूलत: हिंदुत्व किसी भी अतिवादी सोच पर विश्वास नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जाति व्यवस्था विकृति है। हिंदुत्व की भावना से जातीय भेजभाव दूर हो सकता है।

प्रणबदा ने कहा था, 5 हजार वर्षों से देश धर्मनिरपेक्ष

सरसंघचालक ने इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से हुई उनकी मुलाकात पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उस दौरान प्रणबदा ने आरंभ में घरवापसी को लेकर विवाद पर नाराजगी जताई। बाद में उन्होंने कहा कि अगर संघ ने अपने हाथों में काम नहीं लिया होता तो 30 फीसदी समाज देश से दूर हो गया होता। विश्व का सबसे धर्मनिरपेक्ष संविधान हमारा ही है। मोहन भागवत ने कहा कि संविधान के लागू होने से 5 हजार वर्ष पहले से ही देश में धर्मनिरपेक्ष की परंपरा है।

मोहन भागवत ने कहा कि वह साल 2018 में नागपुर में आयोजित संघ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आमंत्रित करने के लिए उनसे मिलने गए तो ‘घर वापसी’ के मुद्दे पर काफी तैयारी करके गए थे। भागवत ने कहा कि उस समय ‘घर वापसी’ के मुद्दे पर संसद में काफी हंगामा हुआ था और वह बैठक के दौरान मुखर्जी द्वारा पूछे जाने वाले किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार थे।

टॅग्स :मोहन भागवतआरएसएसनागपुर
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्ट8 महिला श्रमिकों की मौत, नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रक-टेम्पो में टक्कर

भारततीन मेमू ट्रेनें रद्द, कई ट्रेनें प्रभावित, बालाघाट-इतवारी मेमू पटरी से उतरी, कामठी और कलमना के बीच हादसा

भारतनीतीश कुमार के बाद कौन बनेगा मुख्यमंत्री?, दिल्ली से लेकर नागपुर तक दौड़ लगा रहे भाजपा नेता, देखिए लिस्ट में कौन शामिल?

भारतकौन थे दत्ता मेघे?, 89 वर्ष की आयु में निधन

भारतमध्य प्रदेश राज्यसभा चुनावः 3 सीट खाली और अप्रैल-मई में मतदान?, विधानसभा में 230 विधायक और एक सीट के लिए चाहिए 58 वोट, क्या कांग्रेस बचा पाएगी सीट?

भारत अधिक खबरें

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील

भारत'एकनाथ शिंदे और बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर बातचीत हुई', अंजलि दमानिया का आरोप

भारतमोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारी को किया अगवा और असली आरोपी फरार?, सीएम ममता बनर्जी ने कहा- निर्दोष लोगों को परेशान कर रही एनआईए

भारतघायल हूं इसलिए घातक हूं?, राघव ने एक्स पर किया पोस्ट, मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता, वीडियो

भारत‘फ्यूचर सीएम ऑफ बिहार’?, निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाओ, जदयू कार्यकर्ताओं ने पटना में लगाए पोस्टर