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राजस्थान पुलिस का ऑनर किलिंग के खिलाफ अनोखा प्रचार, कहा- मुगल-ए-आज़म का जमाना गया, जब प्यार किया तो डरना क्या 

By रामदीप मिश्रा | Updated: August 9, 2019 13:43 IST

राजस्थान पुलिस ने साल 1960 में आई फिल्म मुग़ल-ए-आज़म का जिक्र किया गया। इस फिल्म को के. आसिफ ने निर्देशित किया था और यह पांच अगस्त को रिलीज की गई थी।

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ठळक मुद्देराजस्थान सरकार ने ऑनर किलिंग की घटनाओं पर रोकथाम के लिए संशोधित विधेयक सूबे की विधानसभा से पारित करवा लिया, जिसके बाद यह कानून बन गया। अब प्रदेश की पुलिस इस कानून का प्रचार अनोखे अंदाज में कर रही है, जिसमें वह लोगों को बता रही है कि मुग़ल-ए-आज़म का जमाना चला गया है और अब प्यार किया तो डरने की कोई बात नहीं है।

राजस्थान सरकार ने ऑनर किलिंग की घटनाओं पर रोकथाम के लिए संशोधित विधेयक सूबे की विधानसभा से पारित करवा लिया, जिसके बाद यह कानून बन गया। अब प्रदेश की पुलिस इस कानून का प्रचार अनोखे अंदाज में कर रही है, जिसमें वह लोगों को बता रही है कि मुग़ल-ए-आज़म का जमाना चला गया है और अब प्यार किया तो डरने की कोई बात नहीं है।

राजास्थान पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा, 'सावधान! मुग़ल-ए-आज़म का जमाना गया! आपने यदि किसी प्रेमी युगल को शारीरिक आघात पहुंचाने की कोशिश की, तो राजस्थान सरकार के ऑनर किलिंग बिल 2019 के अनुसार आपको आजीवन कैद से मृत्यु दंड तक की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। क्योंकि प्यार करना कोई गुनाह नहीं।' 

राजस्थान पुलिस ने साल 1960 में आई फिल्म मुग़ल-ए-आज़म का जिक्र किया गया। इस फिल्म को के. आसिफ ने निर्देशित किया था और यह पांच अगस्त को रिलीज की गई थी। इसी फिल्म की तस्वीर राजास्थान पुलिस ने ट्वीट की है और उस तस्वीर पर लिखा है, 'जब प्यार किया तो डरना क्या, क्योंकि अब राजस्थान सरकार का कानून है ऑनर किलिंग के खिलाफ।' आपको बता दें कि राजस्थान विधानसभा ने ऑनर किलिंग की घटनाओं पर रोकथाम के लिए संशोधित विधेयक अभी हाल ही में ध्वनिमत से पारित किया था। विधेयक पर चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित हुआ घोषित किया था। 

राज्य की संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने 30 जुलाई को 'राजस्‍थान सम्‍मान और परम्‍परा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्‍वतंत्रता में हस्‍तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक, 2019' सदन में पेश किया था। विधेयक के अनुसार, कथित सम्मान के लिए की जाने वाली हिंसा एवं कृत्य भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है और इन्हें रोकना जरूरी है। 

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को अपने निर्णय में इस संबंध में कानून बनाने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 16 जुलाई को बजट भाषण के जवाब के दौरान मॉब लिंचिंग और आनॅर किलिंग को रोकने के लिए कानून बनाने की घोषणा की थी। 

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