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राजस्थान: कागज पर मौजूद यूनिवर्सिटी को पास कराने का विधेयक लाई सरकार, विधानसभा में करना पड़ा शर्मिंदगी का सामना

By विशाल कुमार | Updated: March 24, 2022 11:45 IST

गुरुकुल शिक्षण संस्थान, सीकर को विश्वविद्यालय के रूप में शामिल करने की मांग करने वाला गुरुकुल विश्वविद्यालय सीकर विधेयक 24 फरवरी, 2022 को विधानसभा में पेश किया गया था।

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ठळक मुद्दे विधेयक में निजी गुरुकुल यूनिवर्सिटी के 80 एकड़ जमीन पर फैलने की जानकारी दी गई थी।विधेयक में बताया गया था कि उसमें 155 एकेडमिक ब्लॉक हैं जिसमें 62 लेक्चर हॉल और 38 लैब हैं।विपक्ष ने पाया कि विश्वविद्यालय विधेयक में निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं था।

जयपुर: बीते मंगलवार को राजस्थान सरकार को तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब राजस्थान विधानसभा ने पाया कि सरकार का अत्याधुनिक विश्वविद्यालय केवल दस्तावेजों पर मौजूद है और सदन ने विधेयक को वापस लौटा दिया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान सरकार द्वारा विधानसभा में लाए गए एक विधेयक में सीकर में एक निजी गुरुकुल यूनिवर्सिटी के बारे में बताया गया था कि वह 80 एकड़ जमीन पर फैला है, उसमें 155 एकेडमिक ब्लॉक हैं जिसमें 62 लेक्चर हॉल और 38 लैब हैं।

गुरुकुल शिक्षण संस्थान, सीकर को विश्वविद्यालय के रूप में शामिल करने की मांग करने वाला गुरुकुल विश्वविद्यालय सीकर विधेयक 24 फरवरी, 2022 को विधानसभा में पेश किया गया था।

मंगलवार को उच्च शिक्षा के प्रभारी मंत्री राजेंद्र सिंह यादव विधेयक को पारित करने के लिए एक प्रस्ताव पेश करने वाले थे।

हालांकि, विपक्ष के उप नेता राजेंद्र राठौर ने पाया कि विश्वविद्यालय विधेयक में निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं था।

मंगलवार को राठौर और विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया स्पीकर के कक्ष में पहुंचे और उन्हें विधेयक में दर्ज स्थान पर कोई यूनिवर्सिटी नहीं होने बारे में बताया।

इसके बाद सीपी जोशी ने सीकर जिला कलेक्टर को मौके का दौरा करने का निर्देश दिया। एक बार जब अधिकारी ने राठौर के दावों की पुष्टि की, तो सरकार को सूचित किया गया और सदन ने विधेयक को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

इस बीच, राठौर और कटारिया ने आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा में एक बड़ा घोटाला होने से रोक दिया गया। इस मुद्दे पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग करते हुए राठौड़ ने आरोप लगाया कि जब विधेयक इतना आगे बढ़ा है, तो जरूर करोड़ों रुपये का आदान-प्रदान हुआ होगा।

वहीं, विधेयक को वापस लेते समय शिक्षा मंत्री राजेंद्र यादव ने उन्हें दी गई झूठी जानकारी के बारे में कुछ नहीं कहा।

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