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रेलवे ने भीड़ भरे मार्गों के लिए लिया बड़ा फैसला, ऑन डिमांड टिकट देगा रेलवे, बिछाया जाएगा दूसरा-तीसरा ट्रैक

By संतोष ठाकुर | Updated: February 16, 2020 08:34 IST

नरेंद्र मोदी सरकार ने रेलवे में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. इसके तहत भीड़ भरे मार्गों में व्यस्त मार्गों पर दो से तीन साल में दूसरा और तीसरा रेलवे ट्रैक बिछाया जाएगा.

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ठळक मुद्देभारतीय रेलवे ने 89 रेलवे प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना में तब्दील कर दिया है.नरेंद्र मोदी सरकार ने सभी प्रोजेक्टंस के लिए 140 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.

दिल्ली—बिहार हो या फिर दिल्ली—महाराष्ट्र या फिर कोई अन्य रेल रूट, भीड़ भरे रेल मार्गों पर अगले पांच साल में ऑन डिमांड रेलवे टिकट मिलने लगेगा. इसके लिए रेलवे ने वृहद योजना बनाई है. देश के सभी व्यस्त मार्गों पर दो से तीन साल में दूसरा और तीसरा रेलवे ट्रैक बिछाया जाएगा. ये कार्य समय पर पूरा किया जा सके, इसके लिए रेलवे ने 89 रेलवे प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना में तब्दील कर दिया है.

इनमें से 58 को सुपर क्रिटिकल या अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ग में रखा गया है. इससे यह लाभ होगा कि केंद्र में किसी भी पार्टी की सरकार आए लेकिन ये प्रोजेक्ट अपनी गति से चलते रहेंगे. उन्हें फंड की समस्या नहीं होगी. रेलवे बोर्ड के चेयरमेन एवं सीईओ विनोद यादव ने कहा कि मौजूदा समय में रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर यह होता था कि सभी प्रोजेक्ट को कुछ—कुछ राशि दी जाती थी.

लेकिन अब पहले उन परियोजना को पर्याप्त पैसा दिया जा रहा है, जिससे रेलवे की गति, दशा और दिशा ठीक करने में सहायता हो. जिन प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना के तहत चिह्नित किया गया है, उन सभी प्रोजेक्ट को 140 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे पैसे की कमी न हो. जब यह पैसा खत्म होगा तो अगले साल फिर हर प्रोेजेक्ट को राशि आवंटित की जाएगी. इसके तहत भीड़ वाले रूट पर दूसरी या तीसरी लाइन डालने के साथ ही सिग्नल और विद्युतीकरण का कार्य किया जाएगा.

स्वर्णिम चतुर्भुज रेलवे ट्रैक पर क्षमता से अधिक दबाव यादव ने कहा कि इस समय देश की स्वर्णिम चतुर्भुज रेलवे ट्रैक पर देश के रेलवे ट्रैफिक का करीब 60 प्रतिशत दबाव है. इन रूटों पर क्षमता से 130—140 प्रतिशत अधिक यात्री व परिचालन दबाव है. हम जानते हैं कि दिल्ली—पटना रेलवे रूट पर डिमांड है, लेकिन हम अधिक ट्रेन नहीं चला सकते हैं, क्योंकि पहले से ही यहां पर जरूरत से ज्यादा दबाव है. ऐसे में ये राष्ट्रीय परियोजनाएं इस समस्या को हल करेंगी। जब दो से तीन साल में इन रूटों पर दूसरा—तीसरा ट्रैक डाल दिया जाएगा, सिग्नल स्वचालित अत्याधुनिक हो जाएंगे.

150 ट्रेनों को निजी क्षेत्र में देने की योजना यादव के अनुसार विशेषीकृत माल वाहक गलियारा बन जाएगा तो हम इन सभी व्यस्त रूटों पर अगले पांच साल में ऑन डिमांड रेलगाड़ी चलाने में सक्षम होंगे. इस समय रेलवे करीब 13 हजार यात्री और 9 हजार माल वाहक रेलगाड़ी चलाता है. इसमें से केवल 150 रेल को निजी क्षेत्र के लिए दिया जा रहा है. रेलवे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सेवाएं जारी रखेगा. 

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