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पंजाब के ‘आढ़तियों’ ने हड़ताल वापस ली, गेहूं की खरीद शुरू

By भाषा | Updated: April 10, 2021 21:01 IST

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लुधियाना/चंडीगढ़, 10 अप्रैल केन्द्र द्वारा किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सीधे उनके बैंक खातों में अंतरण करने संबंधी निर्देश पंजाब सरकार को दिये जाने के खिलाफ शनिवार को राज्य में ‘आढ़तियों’ ने राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने के कुछ घंटे बाद ही इसे वापस ले लिया।

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा उन्हें आश्वासन दिया गया कि वे खरीद प्रणाली का एक अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे। इसके बाद आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।

इससे पूर्व दिन में राज्यभर के लगभग 40 हजार आढ़तिये किसानों को पैसे सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित करने के खिलाफ हड़ताल पर चले गये थे।

आढ़तियों के नेता विजय कालरा ने पंजाब के खाद्य मंत्री भारत भूषण आशु के साथ लुधियाना में एक बैठक की और इसके बाद ‘आढ़तियों’ ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया।

आढ़तियों के हड़ताल वापस लेने की घोषणा करने के बाद उन्होंने कहा कि राज्य में गेहूं की खरीद शुरू होगी।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के आढ़तिया संघ द्वारा अपनी हड़ताल वापस लेने के बाद राज्य में औपचारिक रूप से गेहूं खरीद शुरू की। मुख्यमंत्री ने संघ के सदस्यों को आश्वासन दिया कि आढ़तिये हमेशा राज्य की खरीद प्रणाली का एक अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे।’’

इस बीच चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रक्रिया में आढ़तियों को शामिल किया जाना सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाये जाने के आदेश दिये हैं।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राज्य खाद्य विभाग ने खरीद सॉफ्टवेयर में संशोधन किया है, ताकि किसानों को भुगतान जारी करने की प्रक्रिया में आढ़तियों का शामिल होना जारी रहे।

खाद्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आढ़तियों को पता चल जाएगा कि जो किसान उनसे जुड़े हुए हैं, उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आढ़तियों को एमएसपी भुगतानों से बाहर किये जाने संबंधी भारत सरकार के निर्देशों के बावजूद ‘‘आढ़तिये हमेशा खरीद प्रक्रिया से जुड़े रहेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब तक मैं वहां हूं, आप प्रणाली का हिस्सा रहेंगे, और आपकी भूमिका हमेशा बनी रहेगी।’’

उन्होंने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) अधिनियम के तहत आढ़तियों का कमीशन और अन्य शुल्क जारी रहे।

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना को स्थगित करने के राज्य के अनुरोध को स्वीकार करने से केन्द्र के मना करने पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने इस मुद्दे पर केन्द्र के साथ कड़ी लड़ाई लड़ी लेकिन वे अड़े रहे और यहां तक कहा गया कि अगर हम डीबीटी को लागू नहीं करते हैं तो पंजाब से फसलों की खरीद नहीं की जायेगी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह यह समझने में नाकाम रहे है कि केंद्र सरकार आढ़तियों और किसानों के साथ इतने गलत तरीके से व्यवहार क्यों कर रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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