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भाजपा ने असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" की?, राहुल गांधी ने कहा- कांग्रेस के 'कुछ लोग' TMC हार से खुश?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 5, 2026 12:53 IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक व्यवस्था में संरचनात्मक दरार को दर्शाता है जिसे ममता बनर्जी ने पिछले डेढ़ दशक में खड़ा किया था।

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ठळक मुद्देपश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।प्रमुख राजनीतिक ताकत बनने का लक्ष्य रखा था।तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है।

नई दिल्लीः कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दावा किया कि असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के "मिशन" के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बात कांग्रेस के "कुछ लोगों" और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।

असम चुनाव: भारी जनादेश से उम्मीदें बढ़ीं, भाजपा को मिली नयी राजनीतिक ताकत

असम में मिले भारी जनादेश से उत्साहित भाजपा संभवत: राज्य में हिंदुत्व पर अपना ध्यान केंद्रित करती रहेगी। हालांकि पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे असमिया क्षेत्रवाद हाशिए पर जा सकता है, जबकि कई मतदाता पार्टी की शानदार जीत का श्रेय कल्याणकारी योजनाओं को देते हैं।

कल्याणकारी योजनाएं जहां सत्तारूढ़ गठबंधन की जीत में अहम रहीं वहीं अब उन वादों को पूरा करना महत्वपूर्ण है जो नयी सरकार के लिए वित्तीय परीक्षा तथा चुनौती भी बन सकते हैं।  केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा को तीन सीटों पर जीत मिली, लेकिन उसके वोट शेयर में 2021 के मुकाबले कोई बड़ी बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई। भाजपा के लिए वोट शेयर एक महत्वपूर्ण मानक है, जहां पार्टी ने इस चुनाव में 20 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर राज्य में एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनने का लक्ष्य रखा था।

बंगाल में तृणमूल की हार के बाद ममता बनर्जी की बड़ी चुनौती पार्टी का पुनर्गठन

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक व्यवस्था में संरचनात्मक दरार को दर्शाता है जिसे ममता बनर्जी ने पिछले डेढ़ दशक में खड़ा किया था। इस चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है।

वर्ष 2011 से राज्य की राजनीति की मुख्य धुरी बनी तृणमूल कांग्रेस के लिए यह हार महज चुनावी नहीं, बल्कि प्रणालीगत है। भाजपा ने उस व्यवस्था में निर्णायक सेंध लगाई है, जो केंद्रीकृत नेतृत्व, कल्याणकारी योजनाओं और मजबूत संगठनात्मक ढांचे पर आधारित थी।

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