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झारखंड कांग्रेस में सियासी बवंडर के आसार, निलंबित नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और अध्यक्ष के खिलाफ खोला मोर्चा

By एस पी सिन्हा | Updated: April 16, 2023 17:07 IST

प्रदेश कांग्रेस से निलंबित महासचिव आलोक दुबे, राजेश गुप्ता और सचिव लाल किशोर नाथ शाहदेव ने एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और अध्यक्ष के खिलाफ तीखा हमला बोला है।

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ठळक मुद्दे प्रदेश कांग्रेस से निलंबित नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और अध्यक्ष के खिलाफ तीखा हमला बोलाकहा - देश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, प्रभारी अविनाश पांडेय के नेतृत्व में पार्टी प्रदेश में कमजोर होती जा रही है

रांची: कांग्रेस में जारी सियासी बवंडर अब झारखंड में दिखाई देने लगा है। हाल यह है कि झारखंड में भी कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नजर नहीं आ रहा है। प्रदेश कांग्रेस से निलंबित महासचिव आलोक दुबे, राजेश गुप्ता और सचिव लाल किशोर नाथ शाहदेव ने एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और अध्यक्ष के खिलाफ तीखा हमला बोला है।

निलंबित नेताओं ने कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और प्रभारी अविनाश पांडेय के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी प्रदेश में लगातार कमजोर होती जा रही है। इसके पीछे इन लोगों का तानाशाही रवैया है। आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब बिखराव के कगार पर है। पार्टी के अंदर तानाशाही नहीं चलती। निलंबित सचिव किशोर नाथ शाहदेव ने आरोप लगाया है कि राज्य नेतृत्व के कारण राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। 

उन्होंने कहा कि हम पार्टी के सच्चे सिपाही हैं, इसलिए हम समय-समय पर पार्टी की कमियों को उजागर करने का काम करते रहे हैं और राष्ट्रीय नेतृत्व को बताने का काम करते रहे हैं। आज प्रदेश के प्रभारी और अध्यक्ष के काम से कार्यकर्ताओं में काफी असंतोष है। जब पार्टी सत्ता में होती है तो लोग जुड़ते हैं, लेकिन यहां पार्टी सत्ता में है, फिर भी लोग पार्टी छोड़ रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि झारखंड कांग्रेस के इन तीन नेताओं सहित चार लोगों को 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' में शामिल होने और राज्य नेतृत्व के खिलाफ लगातार बयान देने के आरोप में फरवरी में निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले पिछले साल दिसंबर में आलोक दुबे और डॉ. राजेश गुप्ता सहित कुछ नेताओं ने झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर को 'अक्षम नेता' बताते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। 

उन्होंने आरोप लगाया था कि उनका नेतृत्व राज्य में कांग्रेस के वोट बैंक को कम करेगा और पार्टी के प्रभाव को कम करेगा। इन नेताओं ने भाजपा द्वारा पार्टी को विभाजित करने के कथित गेम प्लान के खिलाफ पार्टी को बचाने की रणनीति तैयार करने के लिए रांची में 'कांग्रेस बचाओ' बैठक की थी।

 

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