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मोरबी पुल हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, 14 नवंबर को सुनवाई के लिए राजी हुआ एससी

By अनिल शर्मा | Updated: November 1, 2022 13:55 IST

याचिका में घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में एक न्यायिक आयोग नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने मोरबी हादसे को लेकर एक पीआईएल दाखिल किया है।याचिका में उन्होंने पुराने पुल, स्मारकों पर होने वाली भीड़ को मैनेज करने के लिए नियम बनाने की मांग की है। 

नई दिल्लीः गुजरात के मोरबी पुल हादसे की न्यायिक जांच को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर 14 नवंबर को सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी हो गया है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों की निगरानी में न्यायिक आयोग गठित कर जांच की मांग की गई है। गौरतलब है कि रविवार को हुए इस हादसे में कम-से-कम 141 लोगों की मौत हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने मोरबी पुल ढहने की घटना की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका में घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में एक न्यायिक आयोग नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

 विशाल तिवारी ने याचिका में मोरबी जैसी घटना दोबारा ना हो, इसके लिए उन्होंने देशभर में पुराने पुल, स्मारकों पर होने वाली भीड़ को मैनेज करने के लिए नियम बनाने की मांग की है। 

मोरबी ब्रिज (गुजरात) के गिरने से 140 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद इसकी मरम्मत करने वाली कंपनी 'ओरेवा' के अधिकारियों समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें ओरेवा के 2 मैनेजर, 2 कॉन्ट्रैक्टर, सिक्योरिटी गार्ड्स और टिकट विक्रेता शामिल हैं। ओरेवा को मरम्मत के लिए 15-साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला था लेकिन कंपनी ने किसी और से काम करवाया।

पुल को 7 महीने की मरम्मत के बाद खोला गया था। 24 अक्टूबर को कंपनी ने इसका निरीक्षण किया और 26 अक्टूबर को आम लोगों के लिए इसको खोल दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक हादसे के वक्त पुल पर 400 से 500 लोग मौजूद थे। घायल लोगों ने बताया कि पुल पर जाने के लिए 17 रुपए की टिकट बेची गई थी। रविवार को हुए इस हादसे में बचाव के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। तीन दिन हो चुके हैं लेकिन बचाव अभियान अभी भी जारी है। 

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