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चारा घोटालाः राजद प्रमुख लालू यादव के लिए एक और परेशानी, 25 फरवरी को पटना सीबीआई कोर्ट पेश होने का फरमान, जानिए

By एस पी सिन्हा | Updated: February 17, 2022 19:37 IST

चारा घोटाले के डोरंडा कोषागार से लगभग 139 करोड़ रुपये गबन करने के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को पहले न्यायिक हिरासत में होतवार स्थित बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया है.

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ठळक मुद्देसीबीआई ने कुल 170 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था.148 आरोपियों के खिलाफ 26 सितंबर 2005 में आरोप तय किया गया था.कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को तय की है.

पटनाः राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. दो दिन पहले उन्हें रांची के डोरंडा कोषागार में दोषी पाया गया था, जिसमें उन्हें आगामी 21 फरवरी को सजा सुनाई जाएगी.

 

लेकिन इसी बीच अब लालू यादव के लिए एक और परेशानी सामने आ गई है. उनके खिलाफ पटनासीबीआई की विशेष अदालत ने पेश होने के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं. यह मामला भी चारा घोटाले से जुड़ा हुआ है. जिसमें लालू यादव सहित तीन लोगों के नाम है. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को तय की है.

अर्थात रांची में सजा सुनाए जाने के बाद लालू यादव को अब पटना सीबीआई कोर्ट में पेश होना होगा. सीबीआई-3 के विशेष जज प्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने चारा घोटाले के एक मामले (आरसी 63 ए/96) में लालू प्रसाद यादव, आरके राणा व फ्रेडरिक करकेटा के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी करने का आदेश दिया है.

बुधवार को विशेष अदालत में लालू प्रसाद के वकील सुधीर कुमार सिन्हा व एजाज खां ने आवेदन देकर यह निवेदन किया गया कि लालू प्रसाद यादव रांची के मामले में दोषी करार दिये जाने के कारण जेल चले गये हैं, इसलिए पटना में चल रहे मामले में प्रोडक्शन किया जाये. जिसे मंजूर कर लिया गया है.

इस संबंध में अदालत ने झारखंड के जेल आइजी को 25 फरवरी को सभी आरोपितों को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है. अदालत ने कहा है कि यदि तय तिथि पर आरोपितों को पेश नहीं कर पाते हैं तो आरोपितों की गवाही कराने की व्यवस्था वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जेल में ही कराने की व्यवस्था करें. 

चारा घोटाला के आरसी 63ए, 1996 से जुडा यह मामला भागलपुर और बांका कोषागार से फर्जी विपत्र के सहारे 46 लाख रुपये की अवैध निकासी का है. बता दें कि प्रोडक्शन वारंट जेल में बंद आरोपितों से जुड़ा होता है. अगर जेल में बंद दोषी को किसी दूसरे मुकदमे की पड़ताल के लिये उससे पूछताछ की जरूरत पड़ती है तो संबंधित अदालत जेल अधीक्षक जेल को वारंट जारी कर आरोपितों को पेश करने का निर्देश देता है. उसे प्रोडक्शन वारंट कहते हैं. प्रोडक्शन वारंट मिलने पर जेल अधीक्षक आरोपित को अदालत के सामने पेश करते हैं.

टॅग्स :लालू प्रसाद यादवसीबीआईझारखंडबिहारपटना
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