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पद्मश्री से सम्मानित डोगरी लेखिका पद्मा सचदेव का निधन, हिंदी और डोगरी दोनों को समृद्ध किया

By अरविंद कुमार | Updated: August 4, 2021 17:22 IST

हिंदी और डोगरी की प्रख्यात लेखिका पद्मा सचदेव (81) का जन्म जम्मू के पुरमंडल इलाके में संस्कृत के विद्वान प्रोफेसर जय देव बादु के घर में 1940 में हुआ था।

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ठळक मुद्देमंगलवार शाम को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।डोगरी और हिंदी में कई किताबें लिखीं।कविता संग्रहों में ‘मेरी कविता, मेरे गीत’ ने 1971 में साहित्य अकादमी पुरस्कार दिलाया।

नई दिल्लीः भारतीय भाषा के साहित्य के लिए आज का दिन दुखद रहा। हिंदी और डोगरी की प्रख्यात लेखिका पद्मा सचदेव आज सुबह मुंबई में निधन हो गया। वह 81 वर्ष की थीं।

उनके परिवार में उनके पति सुरेंद्र सिंह और एक बेटी हैं। साहित्य अकेडमी जनवादी लेखक संघ और हिंदी के अनेक लेखकों ने उनके  निधन पर  गहरा शोक व्यक्त किया है और हिंदी डोगरी दोनों भाषा की क्षति बताया है। साहित्य अकादेमी के सचिव के श्रीनिवास राव न साहित्य अकादेमी की महत्तर सदस्य श्रीमती पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी विलक्षण रचनात्मकता के नाते वे डोगरी एवं हिंदी साहित्य की अविस्मरणीय धरोहर बनी रहेंगी। उनका निधन एक गहरे शून्य के साथ-साथ एक समृद्ध विरासत भी छोड़ गया है। 

अकेडमी द्वारा आयोजित शोक सभा सचिव महोदय ने शोक संदेश पढ़ा एवं उसके बाद एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शोक सभा के बाद उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए साहित्य अकादेमी के समस्त कार्यालयों को आज आधे दिन के लिए बंद किया गया।

1940 में संस्कृत विद्वानों के परिवार में जम्मू में जन्मीं पद्मा जी ने लोककथाओं और लोकगीतों की समृद्ध वाचिक परंपरा से पे्ररित होकर अपना कवि व्यक्तित्व बनाया। 1969 में अपने पहले कविता-संग्रह मेरी कविता मेरे गीत  के साथ राष्ट्रीय साहित्य परिदृश्य में पदार्पण किया। इस पुस्तक को 1971 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया था। 

उनके साहित्य में भारतीय स्त्री के हर्ष और विषाद, विभिन्न मनोभावों और विपदाओं को स्थान मिला है। वह निरंतर अपनी भाषा, वर्तमान घटनाओं, त्यौहारों तथा भारतीय स्त्री की समस्याओं जैसे ज्वलंत विषयों पर समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं में लिखती रहीं।

डोगरी में आठ कविता-संग्रह, 3 गद्य की पुस्तकें तथा हिंदी में 19 कृतियाँ; जिनमें - कविता, साक्षात्कार, कहानियाँ, उपन्यास, यात्रावृत्तांत तथा संस्मरण शामिल हैं, प्रकाशित हुए। इसके अलावा उनकी 11 अनूदित कृतियाँ भी प्रकाशित हैं, जिसमें उन्होंने डोगरी से हिंदी, हिंदी से डोगरी, पंजाबी से हिन्दी तथा हिंदी से पंजाबी, अंग्रेज़ी से हिंदी तथा हिंदी से अंग्रेजी में भी परस्पर अनुवाद किया है।

उनकीं अनेक कहानियों टेली-धारावाहिकों तथा लघु फिल्मों में रूपांतरित किया गया तथा उनके हिंदी और डोगरी गीतों को व्यवासयिक हिंदी सिनेमा ने भी इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी भाषा को पहला संगीत डिस्क भी दिया, जिसमें न केवल गीत, बल्कि धुनें भी रची गईं और उन्हें लता मंगेशकर ने स्वरबद्ध किया। 

पद्मा सचदेव जी को साहित्य अकादेमी पुरस्कार के अलावा केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कविता के लिए कबीर सम्मान, सरस्वती सम्मान, जम्मू-कश्मीर अकादमी का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार तथा भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सहित कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए थे।

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