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कैलाश मानसरोवर यात्रा: नेपाल में फंसे 1500 में से 104 तीर्थयात्रियों को निकाला गया, दो की मौत

By भाषा | Updated: July 3, 2018 19:18 IST

सिमिकोट और तिब्बत में दूतावास के दो - दो कर्मचारियों को तैनात किया गया है। उनके पास जरूरी सुविधाएं हैं जिनके जरिए वहां फंसे हुए भारतीय अपने घरों से संपर्क कर सकते हैं।

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काठमांडो, 3 जुलाई: तिब्बत में कैलाश मानसरोवर की तीर्थ यात्रा से नेपाल के जरिए वापस आने के दौरान फंसे करीब 1,500 भारतीयों में से 100 से ज्यादा को सिमिकोट से मंगलवार को  निकाल लिया गया। वहीं अन्य भारतीयों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। भारतीय खराब मौसम और भारी बारिश के चलते नेपाल के पर्वतीय क्षेत्र में फंस गए हैं। भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने बताया 'अबतब 104 तीर्थयात्रियों को निकाल लिया गया है। उन्हें निकालने के काम में अबतक सात व्यावसायिक उड़ानो का इस्तेमाल किया गया है।' 

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अधिकारी ने बताया कि सिमिकोट और तिब्बत में दूतावास के दो - दो कर्मचारियों को तैनात किया गया है। उनके पास जरूरी सुविधाएं हैं जिनके जरिए वहां फंसे हुए भारतीय अपने घरों से संपर्क कर सकते हैं। निकाले गए तीर्थयात्रियों को भारत की सीमा से लगते नेपालगंज में ले जाया गया है। इस बीच , हुला जिला पुलिस अधिकारी ने बताया कि केरल के नारायणम लीला (56) और आंध्र प्रदेश की सत्या लक्ष्मी की मौत हो गई। पुलिस उपाधीक्षक रबीन श्रेष्ठ के हवाले से 'काठमांडो पोस्ट ' ने कहा कि मानसरोवर से वापस आने के बाद अपने होटल में लीला की अचानक से मौत हो गई , जबकि लक्ष्मी की टकलाकोट में मौत हुई।

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इससे पहले , भारतीय दूतावास ने यहां एक बयान में बताया कि करीब 525 भारतीय तीर्थयात्री हुमला जिले के सिमिकोट में , 550 हिलसा में और अन्य तिब्बत की तरफ फंसे हुए हैं। बयान में बताया गया कि दूतावास कैलाश मानसरोवर यात्रा (नेपाल के जरिए) के नेपालगंज - सिमिकोट - हिलसा मार्ग पर स्थिति पर लगातार नजर बनाया हुआ है। दूतावास ने बताया कि उसने नेपालगंज और सिमिकोट में अपने प्रतिनिधि तैनात किए हैं जो फंसे हुए प्रत्येक तीर्थयात्री के साथ व्यक्तिगत संपर्क में हैं। वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि श्रद्धालुओं को खाने और रुकने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हो। साथ ही दूतावास ने सभी यात्रा संचालकों से कहा है कि वह ज्यादा से ज्यादा तीर्थयात्रियों को जहां तक संभव हो तिब्बत की तरफ रोकने का प्रयास करें क्योंकि नेपाल की तरफ चिकित्सीय और नगरीय सुविधाएं कम हैं। भारत ने फंसे हुए भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए नेपाल सरकार से सेना की हेलीकॉप्टर सेवाएं देने का आग्रह किया है।

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