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One nation, one election: 2029 में एक साथ होंगे लोकसभा और विधानसभा चुनाव!, विधि आयोग कर सकता है सिफारिश, जानें

By सतीश कुमार सिंह | Updated: February 28, 2024 17:51 IST

One nation, one election: विधि आयोग के अलावा पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति भी एक रिपोर्ट पर काम कर रही है। 

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ठळक मुद्देलोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।अप्रैल-मई में होने वाले आगामी लोकसभा चुनावों के साथ कम से कम पांच विधानसभाओं के चुनाव होने की संभावना है।महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के राज्य चुनाव इस साल के अंत में होने की उम्मीद है।

One nation, one election: 'एक राष्ट्र एक चुनाव' पर विधि आयोग बड़ा फैसला कर सकता है। सूत्रों ने कहा कि विधि आयोग 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर संविधान में एक नया अध्याय जोड़ने और 2029 के मध्य तक देश भर में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के लिए एक साथ चुनाव कराने की विशाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया आयोजित करने की सिफारिश कर सकता है। विधि आयोग के अलावा, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति भी एक रिपोर्ट पर काम कर रही है। कैसे संविधान और मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव करके लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं। इस साल अप्रैल-मई में होने वाले आगामी लोकसभा चुनावों के साथ कम से कम पांच विधानसभाओं के चुनाव होने की संभावना है।

विधि आयोग संविधान में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर एक नया अध्याय जोड़ने और 2029 के मध्य तक देशभर में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सिफारिश कर सकता है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

‘एकता सरकार’ के गठन की सिफारिश करेगा

सूत्रों ने कहा कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ऋतुराज अवस्थी की अध्यक्षता वाला आयोग एक साथ चुनावों पर ‘नया अध्याय या खंड’ जोड़ने के लिए संविधान में संशोधन की सिफारिश करेगा। आयोग अगले पांच वर्षों में ‘तीन चरणों’ में विधानसभाओं के कार्यकाल को एक साथ करने की भी सिफारिश करेगा, ताकि देशभर में पहली बार एक साथ चुनाव मई-जून 2029 में 19वीं लोकसभा के चुनाव के साथ हो सकें।

सूत्रों ने बताया कि संविधान के नये अध्याय में ‘एक साथ चुनाव’, ‘एक साथ चुनावों की स्थिरता’ और लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए ‘सामान्य मतदाता सूची’ से संबंधित मुद्दे शामिल होंगे, ताकि त्रि-स्तरीय चुनाव एक साथ ‘एक ही बार में’ हो सकें।

जिस नये अध्याय की सिफारिश की जा रही है, उसमें विधानसभाओं की शर्तों से संबंधित संविधान के अन्य प्रावधानों को खत्म करने की अस्तित्वहीन शक्ति के प्रावधान किये जाएंगे। यदि कोई सरकार अविश्वास के कारण गिर जाती है या त्रिशंकु सदन होता है, तो आयोग विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ ‘एकता सरकार’ के गठन की सिफारिश करेगा।

यदि ‘एकता सरकार’ का सिद्धांत काम नहीं करता है, तो विधि आयोग सदन के शेष कार्यकाल के लिए नये सिरे से चुनाव कराने की सिफारिश करेगा। एक सूत्र ने बताया, ‘‘मान लीजिए कि नये चुनावों की आवश्यकता है और सरकार के पास अब भी तीन साल हैं, तो स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव शेष कार्यकाल के लिए होना चाहिए।’’

विधि आयोग के अलावा, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति भी एक रिपोर्ट पर काम कर रही है कि कैसे संविधान और मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव करके लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।

कम से कम पांच विधानसभाओं के चुनाव होने की संभावना

इस साल अप्रैल-मई में होने वाले आगामी लोकसभा चुनावों के साथ कम से कम पांच विधानसभाओं के चुनाव होने की संभावना है, जबकि महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने की उम्मीद है। बिहार और दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

जबकि असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में 2026 में तथा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर में 2027 में चुनाव होने हैं। वर्ष 2028 में कम से कम नौ राज्यों- त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, कर्नाटक, मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। एक साथ चुनाव मई-जून 2029 में हो सके, जब 19वीं लोकसभा के लिए चुनाव होने हैं।

सरकार ने पिछले साल सितंबर में लोकसभा, विधानसभा, नगर पालिकाओं और पंचायतों के एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे की जल्द से जल्द पड़ताल करने और सिफारिशें करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। महाराष्ट्र का उदाहरण दिया गया और कहा गया कि 2016-17 में राज्य के कुछ या अन्य हिस्से 365 दिन में से 307 दिन तक आचार संहिता के अधीन थे।

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