लाइव न्यूज़ :

’दावत-ए-इफ्तार’ के बहाने बिहार में 'चुनावी रफ़्तार',ने पकड़ी रफ़्तार, नेताओं के यहां दी जाने लगी है इफ्तार पार्टी

By एस पी सिन्हा | Updated: March 24, 2025 20:01 IST

इसी कड़ी में रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सरकारी आवास में दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया था। हालांकि इमारत-ए-सरिया सहित करीब साथ मुस्लिम संगठनों ने इस इफ्तार पार्टी का बहिष्कार किया था। 

Open in App

पटना: बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर सभी सियासी दलों ने तैयारियां करने में जुट गई हैं। इसी कड़ी में ’दावत-ए-इफ्तार’ के बहाने बिहार में 'चुनावी रफ़्तार',को भी तेज किया जाने लगा है। दरअसल, माहे रमजान चल रहा हो तो सभी सियासी दल मुसलमानों को अपने पक्ष में करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सरकारी आवास में दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया था। हालांकि इमारत-ए-सरिया सहित करीब साथ मुस्लिम संगठनों ने इस इफ्तार पार्टी का बहिष्कार किया था। 

इसके बावजूद भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। वहीं एनडीए के नेताओं ने भी इस इफ्तार पार्टी में शामिल होकर एकजुटता दिखाई थी। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी शामिल हुए थे। इस पार्टी में मुख्यमंत्री और राज्यपाल की केमिस्ट्री देखने को मिली थी। 

हालांकि जदयू की ओर से इफ्तार पार्टी के बहिष्कार को खारिज किया था। अब आज राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने रोजेदारों के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। उनका दावा है की बिहार में एमवाई(माय) समीकरण आज भी उनके साथ हैं। हालांकि इसका आयोजन राबड़ी आवास की बजाय पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी के 12 स्ट्रैंड रोड स्थित आवास पर किया गया था। 

रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इफ्तार पार्टी का बहिष्कार करने वाले मुस्लिम संगठनों के नेताओं ने आज इसमें शिरकत की। इससे बिहार में सियासी पारा हाई हो गया है। हालांकि राजद के लोगों का कहना है कि लालू यादव की इफ्तार पार्टी में कई सियासी दलों के नेताओं के साथ-साथ मुस्लिम समाज के लोगों को बुलावा भेजा गया था। 

वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा दी गई इफ्तार पार्टी में मुस्लिम धार्मिक संगठनों के बॉयकॉट पर मंत्री विजय चौधरी ने कहा है कि इससे जदयू की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि कि जिन लोगों ने भी बायकाट का निर्णय लिया निश्चित तौर पर उनका अपना निर्णय था। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग पहुंचे थे, इसका सीधा मतलब है कि उसका कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा है। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों के लिए हमेशा काम किया है। विजय चौधरी ने कहा कि धार्मिक संगठनों को सियासी रूप नहीं लेना चाहिए और जिन कुछ राजनीतिक दलों के चक्कर में धार्मिक संगठन के कुछ लोगों ने इस तरह से इस चीज को बॉयकॉट के रूप में लिया, कहीं ना कहीं इसका बहुत असर नहीं पड़ा है।

 

टॅग्स :बिहाररमजानआरजेडीजेडीयू
Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेपटना स्थित राज्य महिला आयोग के दफ्तर में प्रेमी जोड़े ने की शादी, लड़के ने आयोग के सदस्यों की मौजूदगी में लड़की की मांग भरी

क्राइम अलर्ट2017 में रानी कुमारी से शादी, एक बेटा हुआ?, ससुराल बुलाकर पत्नी ने प्रेमी मो. शहजाद के साथ मिलकर पति महेश्वर राय को मार डाला, दुपट्टे से गला घोंटा

भारतमुख्यमंत्री नीतीश को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा को लेकर सियासत, तेजस्वी ने कहा- ‘असम्‍मान जनक विदाई’, नीरज कुमार बोले- लालू जी की तरह परिवार को सीएम नहीं बनाएंगे?

क्राइम अलर्ट2020 में दोस्ती और 5 साल लिव इन में रहे?, 20 फरवरी 2026 को पटना में शादी, पति नीरज भंसाल मांगता है दहेज, 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ईशिता ने की सुसाइड?

क्राइम अलर्टपड़ोस की युवती से बातचीत, विक्रम मंडल को 3 युवतियों ने पीट पीटकर मार डाला, परिवार में कोहराम

भारत अधिक खबरें

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

भारतउत्तर प्रदेश उपचुनाव 2026ः घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर पड़ेंगे वोट?, 2027 विस चुनाव से पहले सेमीफाइनल, सीएम योगी-अखिलेश यादव में टक्कर?