पटना: बिहार में सत्तारूढ़ दल जदयू की ओर से महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय स्वाभिमान दिवस के मौके पर जमकर सियासी तीर छोड़े गए। इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए विधान पार्षद महेश्वर सिंह ने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर द्वारा रामचरितमानस को लेकर दिए गए विवादित बयान पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कुछ लोग हमारी संख्या की गिनती करवाते हैं। अब तो इतना हो गया है कि रामचरितमानस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। जो लोग इसको लेकर कुछ बोल रहे हैं वो हिजड़े लोग हैं।
उन्होंने कहा कि जिनको रामचरितमानस को लेकर कुछ भी जानकारी नहीं है, वो इसको लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। उनको पहले यह मालूम होना चाहिए कि रामचरितमानस हमें क्या सिख देती है? महेश्वर सिंह ने कहा कि रामचरितमानस हमें यह बतलाता है कि क्षत्रिय धर्म क्या है और माता-पिता के बीच हमारा संबंध की तरह का होना चाहिए? भाई से हमारा नाता कैसा होना चाहिए? इससे हम सीखते हैं कि गुरु और शिष्य का नाता किस तरह का होना चाहिए? यह हमें संस्कार सिखाता हैं न की बड़बोलापन सिखाता है। इसलिए मानस पर बोलने वाले लोग अनपढ़ हैं। उनको इसकी सजा मिलनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने इशारों ही इशारों में मंत्री अलोक मेहता को भी संदेश देते हुए कह किे हम सभी जाती का सपोर्ट करने वाले लोग हैं। हम किसी के ऊपर भी विवादित बयान नहीं देते हैं। हमलोग कभी भी जात-पात नहीं करते हैं। अगर हमलोग जात-पात करते तो भगवान राम सबरी के जूठे बैर नहीं खाते। भगवान राम जब युद्ध लड़ने गए तो वनवासी ने उनका समर्थन किया।
बता दें कि बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा था कि रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। यह समाज को दो भागों में बांटने का काम करता है। इसके बाद बिहार में काफी विवाद हुआ और अभी यह विवाद शांत भी नहीं हुआ था कि अब मंत्री आलोक मेहता ने सवर्णों को लेकरत विवादित बयान दे डाला है।