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राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर शीर्ष नेताओं ने स्वतंत्र प्रेस को ‘लोकतंत्र की आत्मा’ बताया

By भाषा | Updated: November 16, 2020 19:00 IST

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नयी दिल्ली, 16 नवंबर स्वतंत्र प्रेस को ‘लोकतंत्र की आत्मा’ बताते हुए सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत शीर्ष नेताओं ने कोविड-19 महामारी के दौरान अग्रिम योद्धा की तरह कार्य करने के लिए मीडियाकर्मियों की सराहना की।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर अपने संदेश में विभिन्न नेताओं ने कहा कि प्रेस की आजादी पर किसी भी प्रकार का हमला राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदेह है और हर किसी को इसका विरोध करना चाहिए ।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने महामारी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मीडिया की सराहना की वहीं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और केंद्रीय मंत्री अमित शाह और प्रकाश जावडेकर ने देश में प्रेस की आजादी की महत्ता पर जोर दिया और इस पर हमला करने वालों की आलोचना की।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर अपने लिखित संदेश में राष्ट्रपति ने प्रिंट मीडिया का विनियमन करने वाली भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) की भी प्रेस की आजादी की रक्षा करने को लेकर प्रशंसा की।

उन्होंने कहा, ‘‘करीब 55 साल से अपनी सेवा दे रही पीसीआई उत्कृष्ट पत्रकारिता सुनिश्चित करते हुए प्रेस की आजादी की सुरक्षा के लिए प्रहरी बनी रही है। हमारे लोकतंत्र की कार्यप्रणाली में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।’’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘कोविड-19 से जुड़े मुद्दों से निपटने के तहत मीडिया ने लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई है और इस तरह, उसने इस महामारी का प्रभाव कम करने में मदद की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मीडियाकर्मी अग्रिम मोर्चे के कोरोना योद्धाओं में शामिल हैं। पीसीआई के माध्यम से मैं ऐसे मीडियाकर्मियों की प्रशंसा करता हूं।’’

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी कहा कि प्रेस की आजादी पर कोई भी हमला राष्ट्रहित के लिए विनाशकारी है और उसका सभी लोगों द्वारा विरोध किया जाना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र बिना स्वतंत्र एवं निर्भीक प्रेस के फल-फूल ही नहीं सकता।

उन्होंने पीसीआई द्वारा आयोजित वेबिनार में अपने वीडियो संदेश में यह बात कही। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा संवैधानिक कानून के शासन को मजबूत बनाने के लिए एक सशक्त, स्वतंत्र और जीवंत मीडिया, स्वतंत्र न्यायपालिका की तरह ही महत्वपूर्ण है।’’

प्रधानमंत्री ने अपने लिखित संदेश में कहा कि चाहे सकारात्मक तरीके से आलोचना हो या सफलता की गाथा का उल्लेख, मीडिया भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को लगातार मजबूत करने का काम कर रहा है। वेबिनार में प्रधानमंत्री का संदेश पढ़ा गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वृहद फायदे के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर जन जागरूकता पैदा करने से लेकर समाज में व्यवहारगत बदलाव लाने के लिए हमने देखा कि मीडिया ने किस तरह सरकार के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मूल्यवान हितधारक की भूमिका अदा की। पिछले कुछ वर्षों में जन भागीदारी बढ़ाने के लिए स्वच्छ भारत तथा जल संरक्षण जैसे कई अभियानों में भी उसने मदद की है। ’’

प्रधानमंत्री का यह संदेश पीसीआई के अध्यक्ष सी के प्रसाद ने पढ़ा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कोविड-19 के चलते दुनिया अप्रत्याशित संकट का सामना कर रही है, महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई में उसके 130 करोड़ नागरिकों ने अपनी दृढ़ता और संकल्प को दिखाया है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में मीडिया कोविड-19 को लेकर जागरूकता फैलाकर असाधारण सेवा कर रहा है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘कोविड-19 के बाद की दुनिया में भारत मजबूत और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के अपने संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बड़े अभियान को आकार देने तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को आगे ले जाने में मीडिया भी साथ दे रहा है।’’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर पत्रकारों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रेस की आजादी बनाए रखने और इसकी आवाज को कुचलने वालों का मुखरता से विरोध करने के प्रति कटिबद्ध है। शाह ने ट्वीट किया, ‘‘नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार प्रेस की आजादी बनाए रखने और इसकी आवाज को कुचलने वालों का मुखरता से विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है। मैं कोविड-19 के दौरान उल्लेखनीय भूमिका के लिए मीडिया की सराहना करता हूं।’’

प्रेस की आजादी को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि आजादी के साथ जिम्मेदारी की भी भावना आती है।

अपने वीडियो संदेश में जावडेकर ने कहा, ‘‘प्रेस की आजादी लोकतंत्र की आत्मा है। प्रेस की आजादी महत्वपूर्ण है लेकिन किसी भी आजादी के साथ जिम्मेदारी भी आती है । इसलिए प्रेस द्वारा जिम्मेदारी से आजादी का निर्वहन होना चाहिए और खबरों को सनसनीखेज बनाए जाने से दूर रहना चाहिए। किसी भी खबर से किसी को जानबूझकर बदनाम नहीं करना चाहिए। इन दिनों प्रेस की आजादी पर जिस तरह हमले हो रहे हैं, वह ठीक नहीं है। ’’

कुछ न्यूज चैनलों द्वारा टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) के साथ कथित हेराफेरी पर जावडेकर ने कहा कि मंत्रालय की एक कमेटी जल्द ही इन मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट देगी।

जावडेकर ने टीवी चैनलों के लिए नियामकीय संस्था की गैरमौजूदगी के मुद्दे पर भी चर्चा की और कहा कि उनके लिए आचार संहिता लाने का फैसला किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय प्रेस परिषद स्व नियामक संस्था है जिसमें विभिन्न मीडिया संस्थानों और संसद के भी प्रतिनिधि हैं। पीसीआई को और ताकत देने पर चर्चा हुई है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन टीवी चैनलों के लिए पीसीआई जैसी स्वनियामक संस्था नहीं है। हम सभी टीवी चैनलों के लिए आचार संहिता लाने पर सुझाव ले रहे हैं लेकिन इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।’’ साथ ही कहा कि सरकार दखल नहीं देना चाहती है लेकिन ‘‘प्रेस को जिम्मेदार पत्रकारिता का उदाहरण पेश करना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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