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नोएडा स्पोर्ट्स सिटी: कैग ने कहा- अपात्र संस्थाओं को आवंटित किए गए 4,500 करोड़ रुपये के भूखंड

By भाषा | Updated: December 18, 2021 20:46 IST

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नोएडा (उप्र), 18 दिसंबर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट से पता चला है कि नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी के लिए 4,500 करोड़ रुपये के भूखंड उन संस्थाओं को आवंटित किए गए थे जो निर्धारित कुल मूल्य, कारोबार या पिछले अनुभव के तकनीकी पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।

उत्तर प्रदेश सरकार के 'न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) में भूमि अधिग्रहण और संपत्तियों के आवंटन' पर कैग की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट शुक्रवार को विधानसभा में पेश की गई। इसमें यह भी कहा गया है कि स्पोर्ट्स सिटी योजना बिना मंजूरी के शुरू की गई थी।

न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) ने 2011-16 के दौरान चार खेल शहरों के एकीकृत विकास के लिए 33.44 लाख वर्गमीटर माप के चार भूखंड आवंटित किए, ताकि राष्ट्रीय खेलों, राष्ट्रमंडल खेल और एशियाड खेल जैसे प्रमुख खेलों का आयोजन किया जा सके।

ऑडिट से पता चला है कि वर्ष 2008 में पहली स्पोर्ट्स सिटी योजना की शुरुआत के समय मास्टर प्लान-2021 में स्पोर्ट्स सिटी की कोई श्रेणी नहीं थी। इसे मास्टर प्लान -2031 में शामिल किया गया था, जिसे 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था।

कैग ने कहा, "कल्पित स्पोर्ट्स सिटी अवसंरचना संबंधी परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए गंभीर डेवलपर की भागीदारी के साथ सुविधाओं के लिए विस्तृत विनिर्देशों की आवश्यकता थी। हालांकि, नोएडा इच्छित स्पोर्ट्स अवसंरचना के स्तर के लिए कोई विनिर्देश या मानक निर्धारित करने में विफल रहा।"

इसमें कहा गया है, "डेवलपर के लिए निर्दिष्ट तकनीकी पात्रता मानदंड खेल के बुनियादी ढांचे के विकास के बजाय भू-संपदा के विकास पर आधारित थे।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा, 80 करोड़ रुपये से 125 करोड़ रुपये कुल मूल्य के तकनीकी पात्रता मानदंड भी स्पोर्ट्स सिटी भूखंडों के मूल्य के अनुरूप नहीं थे, जो कि 837 करोड़ रुपये से 2,264 करोड़ रुपये के बीच था।

इसमें कहा गया कि चार आवंटन में से तीन में, 25 लाख वर्गमीटर से अधिक के क्षेत्र वाले 4,500 करोड़ रुपये के भूखंड अयोग्य संस्थाओं को आवंटित किए गए थे, जो निर्धारित कुल मूल्य, कारोबार या पिछले अनुभव के तकनीकी पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।

लेखा-जोखा में कहा गया है कि विश्वस्तरीय खेल बुनियादी ढांचे के निर्माण के प्राथमिक लक्ष्य पर "बहुत कम ध्यान" दिया गया और "परिणामस्वरूप, प्रारंभिक योजना के आठ साल बाद भी अब तक (दिसंबर 2019) इन स्पोर्ट्स सिटी भूखंडों में कोई खेल सुविधा विकसित नहीं हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नोएडा प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई के लिए सरकार द्वारा तय की जाने वाली जिम्मेदारी के लिए एक स्पष्ट मामला है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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