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जानिए क्या है बिहार पुलिस का हाल, ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे हैं बेदाग छवि वाले दरोगा-इंस्पेक्टर

By एस पी सिन्हा | Updated: July 28, 2019 16:46 IST

जिलों में तैनात दारोगा और इंस्पेक्टरों में गंभीर आरोप में कोई लाइन हाजिर हो चुका है तो कोई निलंबित चल रहें. डीजीपी का आदेश है कि बेदाग छवि वाले ही अंचल निरीक्षक, थानेदार और अपर थानाध्यक्ष नियुक्त किए जाएं. इस फरमान से हजारों दारोगा और इंस्पेक्टर 'साहब' नहीं बन पाएंगे. 

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ठळक मुद्देबिहार में पुलिस विभाग में बेदाग (स्वच्छ) छवि वाले पुलिस अधिकारियों का टोटा पड़ गया है. हालात ऐसे हो गये हैं कि पुलिस विभाग में बेदाग छवि वाले पुलिस पदाधिकारी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं. पुलिस थाने में बेदाग छवि वाले अफसरों की तैनाती का आदेश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया है. मुख्यमंत्री ने यह आदेश दिया था कि जिनके थाना इलाके में शराब की बिक्री की बात सामने आई उन थानेदारों को दस साल तक थाने का प्रभार नहीं दिया जाए.

बिहार में पुलिस विभाग में बेदाग (स्वच्छ) छवि वाले पुलिस अधिकारियों का टोटा पड़ गया है. हालात ऐसे हो गये हैं कि पुलिस विभाग में बेदाग छवि वाले पुलिस पदाधिकारी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं. दरअसल, पुलिस थाने में बेदाग छवि वाले अफसरों की तैनाती का आदेश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया है. मुख्यमंत्री ने यह आदेश दिया था कि जिनके थाना इलाके में शराब की बिक्री की बात सामने आई उन थानेदारों को दस साल तक थाने का प्रभार नहीं दिया जाए.

अब हालात यह हो गया है कि मुख्यमंत्री का आदेश पुलिस मुख्यालय के लिए भारी पड़ने लगा है. पूरे राज्य के थाने में ऐसे ही बिना आरोप वाले दारोगा और इंस्पेक्टरों की तैनाती करना मुख्यालय के लिए एक चुनौती के रूप में सामने आया है. पुलिस मुख्यालय ऐसे पुलिस पदाधिकारियों की पहचान कर रहा है, जिनपर सालों की सेवा के दौरान वर्दी पर दाग न लगे हों. लेकिन ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में मौजूदा थानेदारों को भी अपनी कुर्सी जाने का डर सता रहा है. 

जिलों में तैनात दारोगा और इंस्पेक्टरों में गंभीर आरोप में कोई लाइन हाजिर हो चुका है तो कोई निलंबित चल रहें. डीजीपी का आदेश है कि बेदाग छवि वाले ही अंचल निरीक्षक, थानेदार और अपर थानाध्यक्ष नियुक्त किए जाएं. इस फरमान से हजारों दारोगा और इंस्पेक्टर 'साहब' नहीं बन पाएंगे.  बताया जा रहा है कि 15 अगस्त से सभी थानों में अपराध नियंत्रण व विधि व्यवस्था तथा अनुसंधान विंग अलग-अलग हो जाएगी. बिहार में 1075 थाने व 225 आउट पोस्ट हैं.  सभी थानों में थानेदार के अलावा अपर थानाध्यक्ष अनुसंधान व अपर थानाध्यक्ष विधि व्यवस्था की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है. दागदार आउट पोस्ट प्रभारियों को भी हटाया जाना है.बिहार में करीब 1400 इंस्पेक्टर और 8700 दारोगा हैं. सूत्रों के अनुसार इनमें भी बीस फीसदी से अधिक अफसर कभी न कभी किसी-न-किसी आरोप से घिर चुके हैं. थानाध्यक्ष, अपर थानाध्यक्ष व ओपी प्रभारी के लिए करीब 3447 ऐसे इंस्पेक्टर-दारोगा चाहिए, जो शराबबंदी कानून के प्रति समर्पित रहे हो. वहीं, भ्रष्टाचार अथवा महिला उत्पीडन आदि संगीन मामले में आरोपित न रहे हो. किसी भी मामले में विभागीय कार्रवाई न हुई हो. 

ऐसे में बिहार पुलिस एसोसिएशन के महामंत्री कपिलेश्वर पासवान का कहना है कि इंस्पेक्टर-दारोगा के खिलाफ झूठी शिकायत बहुत आती हैं. वरिष्ठता के आधार पर तैनाती नहीं हुई तो कई सीनियर अफसरों को जूनियर अफसर के अधीन काम करना पडेगा, यह ठीक नहीं होगा.  

वहीं, एडीजी अपराध नियंत्रण व विधि व्यवस्था अमित कुमार के मुताबिक पुलिस महकमे में पर्याप्त संख्या में इंस्पेक्टर व दारोगा हैं. जिनकी छवि पूरी तरह स्वच्छ है. हालांकि कहा जा रहा है कि सभी जिलों के एसपी-एसएसपी ने साफ छवि वाले पुलिस पदाधिकारियों को ही थानों और ओपी की जिम्मेदारी सौंपने के लिये बीच का रास्ता निकाल लिया है. 

पटना जोन के एक एसपी ने बताया कि वह अपने जिले में बेदाग इंस्पेक्टर और दारोगा की सूची तैयार करा रहे हैं. इनमें वरिष्ठता के आधार पर अंचल निरीक्षक से लेकर अपर थानाध्यक्ष तक की जिम्मेदारी दे दी जाएगी. लेकिन इसमें भी मुश्किलें सामने आ रही हैं. कहीं ना कहीं किसी न किसी पर दाग लगा ही हुआ है. ऐसे में बेदाग को ढूंढ पाना एक बेहद चुनौती के रूप में सामने आ रहा है.

टॅग्स :बिहारनीतीश कुमार
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