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धरती से दूर होते जा रहे हैं चंदा मामा, जानिए क्या पड़ेगा असर, दिन में 24 की जगह हो जाएंगे इतने घंटे

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: August 10, 2024 12:44 IST

विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन से पता चला है कि चंद्रमा धीरे-धीरे लेकिन लगातार पृथ्वी से दूर जा रहा है। इसका सीधा असर पृथ्वी की घूर्णन गति पर पड़ रहा है।

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ठळक मुद्देपृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे लगते हैंयह चक्कर अन्य खगोलीय पिंडों से काफी प्रभावित होता है, जिसमें चंद्रमा भी शामिल हैचंद्रमा धीरे-धीरे लेकिन लगातार पृथ्वी से दूर जा रहा है

नई दिल्ली:  कहानियों में चंद्रमा को धरती का भाई बताया गया है। भारत में दादी-नानी के किस्सों में चंदा मामा का खूब जिक्र होता था। चंदा मामा दूर के जैसी कविताएं भी हर बच्चे के जुबान पर रटी होती हैं। लेकिन अब चंदा मामा सही में दूर जा रहे हैं। हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि चंद्रमा बहुत धीमी गति से धरती से हर साल दूर होता जा रहा है। इसका असर धरती पर भी पड़ सकता है।

पूरा मामला समझिए

पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे लगते हैं। इसे एक दिन कहा जाता है। यह चक्कर अन्य खगोलीय पिंडों से काफी प्रभावित होता है, जिसमें चंद्रमा भी शामिल है। लेकिन अब विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन से पता चला है कि चंद्रमा धीरे-धीरे लेकिन लगातार पृथ्वी से दूर जा रहा है। इसका सीधा असर पृथ्वी की घूर्णन गति पर पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने अब अनुमान लगाया है कि 1.4 अरब साल पहले, पृथ्वी ने 18 घंटे में एक चक्कर पूरा किया था। 

अब अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे लगते हैं। समय में ये बढ़ोतरी चंद्रमा के पृथ्वी से दूर जाने के कारण हुई है। पृथ्वी की घूर्णन गति लगातार कम होती जा रही है। चंद्रमा वर्तमान में पृथ्वी से 3,84,400 किमी दूर है, और पृथ्वी के चारों ओर एक पूर्ण चक्कर पूरा करने में इसे ठीक 27.3 दिन लगते हैं।

विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय में भूविज्ञान के प्रोफेसर स्टीफन मेयर्स के अनुसार जैसे-जैसे चंद्रमा दूर होता जाता है, पृथ्वी की घूर्णन गति धीमी हो जाती है। अध्ययन के अनुसार, चंद्रमा प्रति वर्ष 3.82 सेंटीमीटर की गति से दूर जा रहा है। परिणामस्वरूप आज से 200 मिलियन वर्ष बाद पृथ्वी पर 25 घंटे का दिन हो सकता है। वैज्ञानिक इन बदलावों को "मिलनकोविच चक्र" कहते हैं। 

हालांकि यह वास्तव में कोई नई खोज नहीं है, क्योंकि 1989 में रूसी वैज्ञानिक जैक्स लास्कर द्वारा इस बारे में कई समान अध्ययन प्रकाशित किए गए थे। लेकिन विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय का अध्ययन इस बात पर और ज़ोर देता है कि चंद्रमा का दूर होते जाना पृथ्वी को सीधे कैसे प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिक चंद्रमा और पृथ्वी के बीच संबंधों की अधिक गहन समझ प्राप्त करने के लिए बहुत पुरानी चट्टानों का अध्ययन करने पर भी विचार कर रहे हैं।

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