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"किसी संगठन को अहंकार से पोषित होकर छाती पीटने की जरूरत नहीं", मोहन भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर उत्सव मनाने के विषय में कहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: April 19, 2024 09:45 IST

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि आरएसएस को वास्तव में अपने 100 वर्ष पूरे करने की जरूरत है?

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ठळक मुद्देसंघ प्रमुख ने कहा कि क्या आरएसएस को वास्तव में अपने 100 वर्ष पूरे करने की जरूरत है?मोहन भागवत ने कहा कि क्या संघ के 100 साल पूर्ण होने पर कोई उत्सव होना चाहिएमुझे लगता है कि किसी संगठन को अहंकार से पोषित होने और छाती पीटने की जरूरत नहीं है

नागपुर: आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर एक किताब में इस बात का जिक्र है कि सरसंघचालक मोहन भागवत ने लोगों से 100 फीसदी मतदान की अपील की थी, जिसका 2014 के चुनावों में भाजपा के पक्ष में सकारात्मक परिणाम देखने को मिला था।

संघ के 100 होने पर किताब प्रकाशित करने वाले हिंदुस्तान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष रमेश पतंगे ने चुनाव में भारी मतदान के लिए अपील करने के लिए मोहन भागवत की तारीफ की।

समाचार वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार बीते गुरुवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" के नाम से किताब का विमोचन किया। पुस्तक का संपादन करने वाले पतंगे ने कहा कि भागवत ने 2013 में अपने एक भाषण में 100 फीसदी मतदान का आह्वान किया था. जिसका परिणाम 2014 में भाजपा के पक्ष में देखा गया।

पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि आरएसएस को वास्तव में अपने 100 वर्ष पूरे करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, "यह अक्सर चर्चा के दौरान उठाया जाता है कि क्या संघ के 100 साल पूर्ण होने पर कोई उत्सव होना चाहिए। मुझे लगता है कि किसी संगठन को अहंकार से पोषित होने और छाती पीटने की जरूरत नहीं है।"

संघ प्रमुख ने कहा, "आरएसएस का लक्ष्य ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना है, जो संगठन के आदर्शों को आत्मसात करें। एक बार बालासाहेब देवरस ने कहा था कि आरएसएस जयंती मनाने के लिए नहीं है। इसका काम जल्द से जल्द पूरा करना था, लेकिन इसमें इतने साल लग गये।"

भागवत ने कहा, "इसके अलावा बदलते समय में भी आरएसएस कार्यकर्ताओं का दृष्टिकोण अपरिवर्तित रहना चाहिए और उनका ध्यान केवल और केवल अपने लक्ष्यों पर होना चाहिए।"

मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 30 साल के संघर्ष की सराहना की। उन्होंने देश के लिए तपस्या, निस्वार्थ कार्य और नई पीढ़ी में ऐतिहासिक ज्ञान की कमी पर प्रकाश डाला और स्थायी समृद्धि का आग्रह किया।

टॅग्स :मोहन भागवतआरएसएसSanghRashtriya Swayamsevak Sangh
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