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नरेन्द्र मोदी ने नितिन गडकरी के मंत्रालय का बजट घटाया, नमामि गंगे योजना के बजट में भारी कटौती

By विकास कुमार | Updated: February 2, 2019 17:12 IST

"ना मुझे किसी ने भेजा है, ना मैं यहां आया हूँ, मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है." यह पाठ 2014 लोकसभा चुनाव से पहले नरेन्द्र मोदी ने किया था, लेकिन इस बार के बजट में नमामि गंगे योजना को मिलने वाली राशि में भारी कटौती की गई है.

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ठळक मुद्देपीयूष गोयल ने बजट में इस बार नमामि गंगे योजना को 700 करोड़ का बजट दिया है.नितिन गडकरी संभालते हैं गंगा मंत्रालय का प्रभार. 2018-19 में अरुण जेटली ने 2250 करोड़ का बजट दिया था.

"ना मुझे किसी ने भेजा है, ना मैं यहां आया हूँ, मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है." 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब गुजरात से चलकर नरेन्द्र मोदी काशी नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तो उन्होंने यह पंक्ति माँ गंगा के सम्मान में कही, जिसके बाद लगा कि कोई लाल आया है जो वर्षों से अछूती अपनी गंगा मैय्या को मोक्ष प्रदान करेगा. लेकिन इस बार के बजट में मोदी सरकार ने गंगा पुनरुद्धार के लिए चलये जा रहे नमामि गंगे योजना के बजट में भारी कटौती की है.

नमामि गंगे का मंत्रालय नितिन गडकरी के पास 

पीयूष गोयल द्वारा पेश किए गए बजट में गंगा मंत्रालय को 2019-20 के लिए 700 करोड़ का बजट दिया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 1500 करोड़ कम है. 2018-19 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नमामि गंगे योजना को 2250 करोड़ का बजट दिया था. लेकिन इस बार बजट में भारी कटौती की गई है. तो क्या ये कटौती इसलिए की गई है क्योंकि गंगा मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे नितिन गडकरी का ये दावा है कि मार्च 2019 तक गंगा 80 फीसदी साफ हो जाएगी, या हाल के दिनों में जिस तरह से उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना साधा है उससे लगता है कि ये प्रयास उनके पर कुतरने का भी एक हिस्सा हो सकता है. 

गंगा मैय्या के लाल नरेन्द्र मोदी 

नरेन्द्र मोदी ने उमा भारती से गंगा मंत्रालय का प्रभार लेकर नितिन गडकरी को दिया था. ऐसा कहा जा रहा है कि नितिन गडकरी ने मंत्रालय का प्रभार संभालने के बाद कई कदम उठाये हैं जिससे परिणाम भी सामने आने लगे हैं. पीएम मोदी ने हाल ही में वाराणसी में गंगा नदी पर चलने मालवाहक जहाजों को हरी झंडी दिखाया था. यह नितिन गडकरी के दिमाग की उपज था. सड़क निर्माण और नए तकनीको के उपार्जन में नितिन गडकरी को महारथ हासिल है, इसलिए इन्हें मोदी सरकार के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों में गिना जाता है. 

हाल के दिनों में कई मौकों पर नितिन गडकरी ने कहा था कि नेताओं को वही वादा करना चाहिए जिसको पूरा किया जा सके, वरना जनता पिटाई भी करती है. कहा जा रहा है कि उनके इसी बयान से केंद्रीय नेतृत्व नाराज चल रहा है. 

नितिन गडकरी की दावेदारी कितनी मजबूत 

नितिन गडकरी संघ के बहुत करीबी और दुलारे माने जाते हैं. नागपुर से सांसद हैं और अपने क्षेत्र के एक चर्चित नेता भी. गडकरी को मोदी सरकार के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों में गिना जाता है. मीडिया में भी उनकी छवि एक परफार्मिंग मिनिस्टर और पारदर्शी नेता की है. बिज़नेस की अच्छी समझ और महाराष्ट्र से होने के कारण नितिन गडकरी की कॉर्पोरेट लॉबी भी बहुत मजबूत मानी जाती है. अरविन्द केजरीवाल की बीजेपी में एक मात्र नितिन गडकरी से ही अच्छी बनती है. विपक्ष में भी ऐसे तमाम नेता हैं जिनके गडकरी से अच्छे संबंध हैं. गोवा में भाजपा की कम सीटें होने के बावजूद उन्होंने भाजपा की सरकार बनवाकर उन्होंने खुद को एक बेहतरीन पॉलिटिकल मैनेजर भी साबित कर दिया है.

टॅग्स :नितिन गडकरीनरेंद्र मोदीनमामी गंगे परियोजनापीयूष गोयल
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