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आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मायावती असहमत! कहा- अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण सही नहीं

By राजेंद्र कुमार | Updated: August 4, 2024 19:21 IST

सुप्रीम कोर्ट के यह फैसला किया था कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण (कोटे के भीतर कोटा) करने का संवैधानिक अधिकार है, जो सामाजिक रूप से विषम वर्ग का निर्माण करते हैं, ताकि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए आरक्षण दिया जा सके.

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ठळक मुद्देआरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मायावती असहमतअनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण सही नहींमायावती ने कहा है कि एससी-एसटी आरक्षण व्यवस्था को लेकर संविधान में उचित संशोधन करना चाहिए

लखनऊ : अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने असहमती जता दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पांच दिन बाद मायावती ने साफ शब्दों में यह कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के एससी जाति के बीच उपजाति विभाजन करने के फैसले से वह सहमत नहीं हैं. आरक्षण पर नई सूची बनाने से कई तरह की परेशानी होगी. एससी-एसटी के बीच उपजाति का विभाजन करना सही नहीं है. सुप्रीम कोर्ट को क्रीमीलेयर को लेकर मानक भी तैयार करना चाहिए था. मायावती ने कहा है कि एससी-एसटी आरक्षण व्यवस्था को लेकर संविधान में उचित संशोधन करना चाहिए और इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में डाला जाना चाहिए.

यूपी की मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती अनुसूचित जातियों को मिले आरक्षण में छेड़छाड़ के खिलाफ हैं. उन्होने कहा है कि अदालत के फैसले से कहीं न कहीं आरक्षण को खत्म करने का प्लान है. उन्होंने सवाल किया है कि अदालत ने फैसले में क्रीमीलेयर का जिक्र किया है, लेकिन इसका मानक क्या है? कौन सी जाति इस दायरे में आएगी इसकी कोई जानकारी नहीं है. आरक्षण में वर्गीकरण का मतलब आरक्षण को समाप्त करके उसे सामान्य वर्ग को देने जैसा होगा. मायावती का यह भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के अदालत के फैसले के बाद आरक्षण को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों में मतभेद की स्थिति बनेगी. सरकारें मनचाही जातियों को आरक्षण देने का काम करेंगी. इससे असंतोष की भावना पैदा होगी. क्योंकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों द्वारा अत्याचारों का सामना एक ग्रुप के रूप में किया गया है और यह समूह समान है, इसलिए किसी भी तरह कोटे में कोटा की व्यवस्था तैयार करना सही नहीं होगा.

सुप्रीम कोर्ट का यह था फैसला 

सुप्रीम कोर्ट ने बीटी एक अगस्त को यह कहा था कि आरक्षण नीति पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है. अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों के उत्थान के लिए नए तरीकों की जरूरत है. इसी सोच के तहत सुप्रीम कोर्ट के यह फैसला किया था कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण (कोटे के भीतर कोटा) करने का संवैधानिक अधिकार है, जो सामाजिक रूप से विषम वर्ग का निर्माण करते हैं, ताकि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए आरक्षण दिया जा सके. इस फैसले को लेकर  मायावती ने कहा कि क्योंकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों द्वारा अत्याचारों का सामना एक समूह के रूप में किया गया है और यह समूह समान है, इसलिए किसी भी तरह का उप-वर्गीकरण करना सही नहीं होगा. 

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