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23 जून को होने वाली विपक्ष की बैठक में मणिपुर हिंसा का मामला उठाया जाएगा, भाकपा नेताओं से मिले पूर्वोत्तर के कई दलों के नेता

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: June 21, 2023 16:07 IST

पटना में होने वाली इस बैठक से पहले पूर्वोत्तर की 10 समान विचारधारा वाली पार्टियों के नेताओं ने दिल्ली में बुधवार (21 जून) को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेताओं से मुलाकात की।

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ठळक मुद्दे23 जून को विपक्षी एकता की कोशिश के तहत पटना में बैठक होनी हैमणिपुर में जारी जातीय हिंसा का मुद्दा उठाएगा विपक्षमणिपुर में 3 मई से शुरू हुई हिंसा अब भी जारी है

नई दिल्ली: 23 जून को विपक्षी एकता की कोशिश के तहत पटना में बैठक होनी है। इस बैठक में कांग्रेस, सपा, आम आदमी पार्टी, राजद सहित अन्य दलों के कई बड़े नेताओं के शामिल होंगे। बैठक में वामदल भी शामिल होंगे। पटना में होने वाली इस बैठक से पहले  पूर्वोत्तर की 10 समान विचारधारा वाली पार्टियों के नेताओं ने दिल्ली में बुधवार (21 जून) को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेताओं से मुलाकात की।

वामपंथी नेताओं के साथ बैठक में विपक्षी दलों ने मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तक्षेप करने की मांग करने का मुद्दा उठाया। 

पूर्वोत्तर की 10 समान विचारधारा वाली पार्टियों के नेताओं से मुलाताक के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव दोरायसामी राजा ने कहा कि विपक्षी एकता का प्रमुख मुद्दा अब मणिपुर हिंसा है। यह समय की मांग है, हम हर मुद्दे को एक तरफ रखेंगे। डी रादा ने कहा की हम पहले हर पार्टी से मणिपुर के मुद्दे पर बात करेंगे और ये मुद्दा उठाएंगे कि राज्य और केंद्र सरकार ने मणिपुर को कैसे जलता हुआ छोड़ दिया है। 

 बैठक के बाद, सीपीआई के वरिष्ठ नेता डी राजा ने कहा कि पटना में हमारी विपक्षी एकता की एक बड़ी बैठक है और शुक्रवार (23 जून) को होने वाली उस बड़ी विपक्षी एकता बैठक में हम सभी ने सर्वसम्मति से मणिपुर के मुद्दे को उठाने का फैसला किया है। डी राजा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि मणिपुर का मुद्दा हमारी बैठक का मुख्य मुद्दा होना चाहिए क्योंकि इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप हैं।

बता दें कि मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई  हिंसा अब भी जारी है। सेना, असम राइफल्स और मणिपुर रैपिड एक्शन फोर्स स्थिति संभालने में जुटी हैं लेकिन फिर भी स्थिति बार बार बिगड़ रही है। पूर्व आर्मी चीफ वीपी मलिक भी  PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से दखल देने की अपील कर चुके हैं।

कांग्रेस ने तो सीधे आरोप लगाते हुए कहा है कि जो भी दिन बीत रहा है वो ये विश्वास दिला रहा है कि पीएम मोदी और बीजेपी समाधान के बजाय संघर्ष को और लंबा करने में लगी हुई है।

 

 

 

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