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Maharashtra Vidhan Sabha Chunav: चुनावों में हिंसा की घटनाएं आखिर क्यों होती हैं? 

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: November 20, 2024 05:50 IST

Maharashtra Vidhan Sabha Chunav:  कुछ समय से चुनावों के दौरान जिस तरह की अलोकतांत्रिक घटनाएं बढ़ रही हैं, उससे लोकतंत्र को मजबूत बनाने की जरूरत पहले से भी ज्यादा महसूस हो रही है.

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ठळक मुद्देदेश-प्रदेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सशक्त हो सके.दुनिया में भारत का लोकतंत्र ही सबसे मजबूत माना जाता है.राज्यों की अपेक्षा महाराष्ट्र को बहुत शांत माना जाता रहा है.

Maharashtra Vidhan Sabha Chunav: आज बुधवार का दिन महाराष्ट्र के लिए खास है. विधानसभा चुनाव के लिए आज मतदान का दिन है; लोकतंत्र का पर्व. आप जब यह पंक्तियां पढ़ रहे होंगे तो शायद मतदान के लिए जाने की तैयारी भी कर रहे होंगे! जाति, धर्म, वर्ग- सबके ऊपर उठकर है यह पर्व. आपके मतदान से ही लोकतंत्र को मजबूती मिलती है, इसलिए वोट डालने जरूर जाएं, ताकि ऐसे समय में, जबकि दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र खतरे में पड़ता नजर आ रहा है,  हमारे देश-प्रदेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सशक्त हो सके.

वैसे दुनिया में भारत का लोकतंत्र ही सबसे मजबूत माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से चुनावों के दौरान जिस तरह की अलोकतांत्रिक घटनाएं बढ़ रही हैं, उससे लोकतंत्र को मजबूत बनाने की जरूरत पहले से भी ज्यादा महसूस हो रही है. हिंसा की घटनाएं चुनावों के दौरान पहले भी होती रही हैं, लेकिन अन्य राज्यों की अपेक्षा महाराष्ट्र को बहुत शांत माना जाता रहा है.

दुर्भाग्य से परिदृश्य अब वैसा नहीं दिखाई दे रहा है. मतदान का दिन करीब आते-आते तो हालत यहां तक पहुंच गई कि राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के वाहन पर हमला हो गया, उनका सिर फोड़ दिया गया. जलगांव में एक निर्दलीय विधायक के घर पर गोलीबारी की गई, भाजपा प्रत्याशी  प्रताप अड़सड़ की बहन अर्चना रोठे पर जानलेवा हमला हुआ.

हिंगोली में भी एक उम्मीदवार की कार पर अज्ञात लोगों ने हमला किया. हिंसा की ये घटनाएं बिहार, उत्तर प्रदेश और प. बंगाल जैसे राज्यों की याद दिलाती हैं. वैसे बिहार, उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार आया है. दुर्भाग्य से महाराष्ट्र जैसे शांत और प्रगतिशील माने जाने वाले राज्य में हिंसा की बढ़ती घटनाएं राज्य के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं दे रही हैं. इसलिए अब राज्य के मतदाताओं को ही ध्यान रखना होगा कि उनके प्रदेश में चुनावों पर हिंसा की छाया न पड़ने पाए.

वैचारिक विचार-विमर्श और बहस-मुबाहसों में ही महाराष्ट्र सदैव अग्रणी रहा है और वही उसकी पहचान बनी रहनी चाहिए, हिंसा की घटनाएं नहीं. मतदाता ही लोकतंत्र में सर्वोपरि होता है और असामाजिक तत्वों या हिंसा फैलाने वालों को यह अहसास होना चाहिए कि उनके कृत्यों का खामियाजा उन्हें चुनाव में भुगतना पड़ सकता है.

टॅग्स :महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024चुनाव आयोगAssemblyविधानसभा चुनाव
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