इंदौर: मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रि-परिषद बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कुल 38,555 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान कीं। बैठक सुबह सभागार में शुरू हुई, जिसमें सभी प्रमुख मंत्री व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 16वें वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) के लिए ये निर्णय बुनियादी ढांचे, कृषि आत्मनिर्भरता, आईटी, महिला-बाल कल्याण व व्यापारिक हितों को मजबूत करने पर केंद्रित रहे।
सबसे पहले लोक निर्माण विभाग को सड़क निर्माण व आवास अनुरक्षण के लिए 32,405 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, जिसमें ग्रामीण सड़कें व जिला मार्ग उन्नयन पर 24,300 करोड़, सेतु संधारण पर 6,150 करोड़, शासकीय आवास रखरखाव पर 1,345 करोड़ तथा सड़क सुरक्षा कार्यों पर 610 करोड़ का प्रावधान शामिल है। इसके बाद किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग को "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के लिए 2,442.04 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई, जो केंद्र सरकार के 11 अक्टूबर 2025 प्रारंभ मिशन पर आधारित है।
यह योजना 2026-31 तक चलेगी, जिसमें उन्नत बीज उत्पादन-वितरण, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण इकाइयां व भंडारण को बढ़ावा देकर दलहन उत्पादन में वृद्धि व किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है। फिर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स व आईटी कार्यों के लिए 1,295.52 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसमें भोपाल के बांदीखेड़ी में 209 एकड़ EMC 2.0 क्लस्टर स्थापना (225.32 करोड़), आईटी निवेश प्रोत्साहन (300 करोड़), स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क (SWAN, 526 करोड़), ई-दक्ष प्रशिक्षण व आरसीबीसी-एनआईसी संचालन शामिल हैं, जो रोजगार व ई-गवर्नेंस को गति देंगे।
इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनवाड़ी केंद्रों व समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य के लिए 2,412 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इसमें 1,500 नवीन केंद्र निर्माण (1,800 करोड़), मिशन वात्सल्य (606.68 करोड़) व स्वच्छता एक्शन प्लान (5 करोड़) हैं, जो किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों को पोषण, शिक्षा व संरक्षण प्रदान करेंगे।
अंत में प्रदेश के व्यापारियों के कल्याण के लिए 'राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड' व जिला स्तरीय समितियों का ऐतिहासिक गठन मंजूर किया गया। बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सदस्यों में उद्योग मंत्री, वित्त-कृषि-स्वास्थ्य आदि विभागों के अधिकारी, सीआईआई-फिक्की-लघु उद्योग भारती प्रमुख, नाबार्ड-आरबीआई प्रतिनिधि व अन्य शामिल हैं। बोर्ड की बैठकें तिमाही व जिला समितियों की मासिक होंगी, जो व्यापारिक समस्याओं का त्वरित निराकरण व सरकार-व्यापारियों के बीच सीधा संवाद सुनिश्चित करेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे, किसानों को आत्मनिर्भरता देंगे, व्यापारियों को सशक्त करेंगे व ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान करेंगे।