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मध्यप्रदेश: लोकसभा चुनाव के लिए BSP बना रही 29 सीटों पर लड़ने की रणनीति, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुए सक्रिय

By राजेंद्र पाराशर | Updated: December 24, 2018 18:45 IST

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बसपा की हार के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सत्यप्रकाश सखवार ने चुनाव के दौरान संगठन के पदाधिकारियों और उत्तरप्रदेश के भेजे गए प्रभारियों की शिकायत कर इस्तीफा भेज दिया था।

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को अपेक्षा के अनुसार परिणाम न मिलने के बाद अब मायावती ने हार का कारण जानने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम को राजधानी भेजा है। वे यहां जोन प्रभारियों के साथ लगातार बैठकें कर हार के कारणों को तो जान रहे हैं, साथ ही राज्य की सभी 29 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने पर भी मंथन कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव में बसपा को केवल दो स्थानों पर ही जीत हासिल हुई, इसके साथ ही उसका मत प्रतिशत भी गिरा। इससे चिंतित बसपा सुप्रीमों ने पहले तो प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्ष को पद से हटा दिया। साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम को प्रदेश का प्रभार सौंपा है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार को हटा कर नया अध्यक्ष डी पी चौधरी को बनाया है। मायावती के निर्देश पर इन दिनों गौतम राजधानी में डेरा डाले हुए हैं।

उन्होंने आज जोन प्रभारियों के साथ बैठकें की और हार पर मंथन किया। हार के कारणों को जानने के साथ ही गौतम ने प्रदेश के सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में बसपा के प्रत्याशियों को मैदान में उतारने को लेकर जोन प्रभारियों से वहां के राजनीतिक समीकरणों की जानकारी ली। इस बार बसपा पूरे 29 स्थानों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने की रणनीति बना रही है। बसपा को पिछले विधानसभा चुनाव में 5 स्थानों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि इस बार उसे मात्र दो ही स्थानों पर जीत मिली है।

उल्लेखनीय है कि बसपा को प्रदेश में अपेक्षा अनुरुप विधानसभा चुनाव में परिणाम नहीं मिले, जिसके चलते प्रदेश संगठन से मायावती खफा थी। इसके चलते उन्होंने पूरे संगठन में बदलाव के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही चौधरी को निर्देशित किया है कि वे जोन स्तर पर लगातार बैठकें कर लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटें। इसके तहत ही आज राजधानी में बसपा पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बसपा की हार के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सत्यप्रकाश सखवार ने चुनाव के दौरान संगठन के पदाधिकारियों और उत्तरप्रदेश के भेजे गए प्रभारियों की शिकायत कर इस्तीफा भेज दिया था। इसके बाद मायावती ने सक्रियता दिखाई है। सखवार ने शिकायत में कहा था कि हार के लिए संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ-साथ प्रदेश प्रभारियों की पूरी जिम्मेदारी है। इन्होंने प्रत्याशियों के साथ सामंजस्य बैठाकर चुनाव नहीं लड़ा।

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