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कॉल गर्ल बुलाने के मामले में फंसे मधेपुरा के डीएसपी को मिली क्लीन चिट, होगी निलंबन की कार्रवाई

By एस पी सिन्हा | Updated: September 8, 2022 19:13 IST

डीएसपी अमरकांत चौबे पर महिला द्वारा लगाये गये कॉलगर्ल मंगवाने का लगाया गया आरोप झूठा निकला है। महिला के द्वारा आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था, जिससे पुलिस की काफी भद्द पिट गई थी। 

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ठळक मुद्देमहिला द्वारा लगाये गये कॉलगर्ल मंगवाने का लगाया गया आरोप झूठा निकलामहिला के द्वारा आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ थावीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस महकमा पर उठे थे सवाल

पटना: अपने आवास पर कॉलगर्ल बुलाने वाले मधेपुरा में प्रभारी एसपी रहे डीएसपी अमरकांत चौबे को जांच में क्लीन चिट मिल गई है। अमरकांत चौबे पर महिला द्वारा लगाये गये कॉलगर्ल मंगवाने का लगाया गया आरोप झूठा निकला है। महिला के द्वारा आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था, जिससे पुलिस की काफी भद्द पिट गई थी। 

सुपौल एसपी डी अमरकेश के नेतृत्व में चार सदस्यी टीम ने डीआईजी शिवदीप लांडे को रिपोर्ट सौंपी तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। बताया जाता है कि जांच टीम ने सिर्फ कार्य में लापरवाही बरते जाने का दोषी पाया जिसके बाद डीआईजी शिवदीप लांडे के द्वारा इस प्रकरण में हेडक्वार्टर डीएसपी अमरकांत चौबे को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबन के लिए मुख्यालय को लिखा गया। 

वहीं चार पुलिसकर्मियों को मामले में निलंबित कर दिया गया है। सुपौल एसपी की जांच में डीएसपी द्वारा कॉलगर्ल बुलाए जाने के मामले में क्लीन चिट दी गयी है, लेकिन सरकारी फोन गुम होने को लेकर उन पर कार्य में लापरवाही के आरोप लगे हैं। 

वहीं इस मामले में डीएसपी पर आरोप लगाने वाली महिला सप्लायर का वीडियो बनाने वाले पुलिस पदाधिकारी सहित चार कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मधेपुरा सदर एसडीपीओ अजय नारायण यादव पर यह वीडियो वायरल करने का आरोप है। 

डीआईजी शिवदीप लांडे ने सदर एसडीपीओ अजय नारायण यादव के निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई के लिऐ भी लिखा है। आरोप है कि उन्होंने पुलिस की छवि को धूमिल करने का काम किया है। डीआईजी शिवदीप लांडे ने बताया कि महिला द्वारा केवल मनगढ़ंत कहानी बना कर पुलिस को बदनाम कर खुद को बचाने की कोशिश की गई। 

महिला के मोबाइल नंबर का सीडीआर निकालने व विश्लेषण करने पर पाया गया कि उक्त महिला जुलाई व अगस्त में तीन-तीन बार मधेपुरा गई है। सदर अस्पताल में महिला का निजी सुरक्षा गार्ड से सांठगांठ का पता चला है। इतना ही नहीं महिला द्वारा तीन अन्य व्यक्तियों के साथ डीएसपी मुख्यालय का फोटो दिखाकर पहचानने को कहने पर उक्त महिला मुख्यालय डीएसपी को पहचान तक नहीं पाई। 

जांच टीम की रिपोर्ट से जो जानकारी सामने आई है। उसके अनुसार डीएसपी द्वारा अपने आवास पर कॉल गर्ल के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। डीआईजी ने बताया कि महिला चोरी के आरोप से बचने के लिए मनगढ़ंत कहानी गढ़कर मुख्यालय डीएसपी पर आरोप लगा रही थी।

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