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Lok Sabha Elections 2024: "मोदी सत्ता में लौटे तो भाजपा का वजूद खत्म हो जाएगा, देश में चुनाव नहीं होंगे, सिर्फ मोदी ही रहेंगे", स्टालिन ने कहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: April 7, 2024 08:43 IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भाजपा पर हमला करते हुए हुए कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव महज चुनाव नहीं बल्कि विचारधाराओं का युद्ध है।

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ठळक मुद्देएमके स्टालिन ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव महज चुनाव नहीं बल्कि विचारधाराओं का युद्ध हैभाजपा की विचारधारा समानता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के लिए भारी अभिशाप हैस्टालिन ने कहा कि अगर मोदी सत्ता में लौटे तो देश में आगे कोई चुनाव नहीं होंगे, भाजपा खत्म हो जाएगी

चेन्नई: तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव प्रचार अपने चरम पर है, यहां 19 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा। डीएमके प्रमुख और सूबे के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दिल्ली सत्ता की अगुवाई कर रही भाजपा पर बेहत तीखा हमला करते हुए कहा कि आगामी आम चुनाव भाजपा को दक्षिण भारत से बहुत बड़ा झटका मिलने वाला है। सीएम स्टालिन ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव महज चुनाव नहीं बल्कि विचारधाराओं का युद्ध है।

समाचार वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स को दिये इंटरव्यू में स्टालिन ने बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि भाजपा की विचारधारा सामाजिक न्याय, समानता, लोकतंत्र, बंधुत्व, धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के लिए अभिशाप है। उसके वही मूल्य हैं, जो द्रविड़ आंदोलन द्वारा पोषित और समर्थित हैं। यही कारण है कि तमिलनाडु में डीएमके भाजपा का पुरजोर विरोध कर रही है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की एआईएडीएमके एक ऐसी अवसरवादी और वैचारिक रूप से दिवालिया पार्टी है, जिसने भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इसलिए डीएमके के लिए दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है।

स्टालिन ने कहा, "चुनावी मैदान में अन्नाद्रमुक हमारी प्राथमिक प्रतिद्वंद्वी है, लेकिन केंद्र में भाजपा का फासीवादी शासन हमारा सबसे बड़ा वैचारिक दुश्मन है, जिससे इस देश को बचाने के लिए हम सत्ता से बाहर खदेड़ना चाहते हैं। यही कारण है कि देश के विभिन्न राजनीतिक समूहों के नेताओं ने आपसी मतभेदों को भुलाकर नरेंद्र मोदी के निरंकुश शासन के खिलाफ हाथ मिलाया है। हमारा एक एजेंडा और एक प्रतिद्वंद्वी है- संविधान बचाएं और भाजपा के कुशासन को समाप्त करें।"

डीएमके नेता स्टालिन ने कहा, "भाजपा नेतृत्व इस लोकसभा चुनाव में उत्तर भारत में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए दक्षिण भारत की ओर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भाजपा ने इसके लिए अथक प्रयास किया, मोदी ने कई रोड शो किये बावजूद उसके कांग्रेस ने हाल के विधानसभा चुनाव में कर्नाटक और तेलंगाना में जनादेश हासिल किया। भाजपा एक बात अच्छे से समझ ले कि तमिलनाडु में उसका तथाकथित उभार एक कल्पना भर है। तमिलनाडु हमेशा की तरह एक धर्मनिरपेक्ष गढ़ बना रहेगा। दक्षिण भारत की जनता इस बार भी भाजपा को करारा झटका देगा।"

सीएम स्टालिन ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, "अगर मोदी सत्ता में लौटे तो देश में आगे कोई चुनाव नहीं होंगे। लोग इस बात को अच्छे से समझते हैं कि मोदी चुनावी लोकतंत्र को निर्वाचित निरंकुशता में बदलने का इरादा रखते हैं। इस चुनाव में सर्वोपरि मुद्दा भारत को एक अधिनायकवादी, एकात्मक राज्य बनने से रोकना है। अगर मोदी दोबारा सत्ता में आए तो हमारे पूर्वजों ने जिस भारत की कल्पना की थी, वह विचार नष्ट हो जाएगा।"

डीएमके प्रमुख ने कहा, "मोदी शासन में धन कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में केंद्रित है। मीडिया संगठन स्वतंत्र रूप से काम नहीं पा रहे हैं। सेंसरशिप निरंकुश हो गई है, जैसा कि हम आज अधिकांश हिंदी और अंग्रेजी समाचार चैनलों में देख रहे हैं और सबसे बड़ी बात की मोदी की सत्ता में वापसी स्वयं भाजपा के लिए बहुत घातक होगी। बतौर पार्टी भाजपा का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और सिर्फ मोदी ही रहेंगे। मेरी इन बातों को महज राजनीतिक बयानबाजी के रूप में खारिज न किया जाए बल्कि लोग मेरी बातों को गंभीरता से लें।"

वहीं इंडिया गठबंधन के पीएम चेहरे पर बात करते हुए स्टालिन ने कहा कि यह देश ही हमारे प्रधानमंत्री पद का चेहरा है। उन्होंने कहा कि 4 जून को मोदी सरकार की बार के बाद इस देश को इंडिया गठबंधन की ओर से एक सक्षम प्रधानमंत्री मिलेगा, जो वास्तव में जनता के विषय में चिंतित होगा।

उन्होंने कहा, "देश का आदर्श प्रधानमंत्री वह है, जिसे किसी कृत्रिम छवि की आवश्यकता नहीं हो। वह गरीबों की देखभाल करता है, सत्ता के विकेंद्रीकरण में भरोसा रखता हो। देश का प्रधानमंत्री बहुलता का जश्न मनाता है और देश को सच्चे प्यार और प्रतिबद्धता के साथ चलाता हो। इस देश ने कभी सामाजिक न्याय के मसीहा वीपी सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में देखा था। उनकी स्मृति आज भी हम सबने संजोकर रखी है। शपथ ग्रहण करते समय और पद छोड़ते समय उन्होंने समान व्यवहार बनाए रखा।"

स्टालिन ने कहा, "2004 के चुनाव के दौरान किसी को भी यह अनुमान नहीं था कि अर्थशास्त्री डॉक्टर मनमोहन सिंह देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। सोनिया गांधी ने उन्हें यूपीए को मिले जनादेश की जिम्मेदारी सौंपी, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के नई ऊंचाइयां हासिल कीं। आज भी इंडिया गठबंधन में देश का नेतृत्व करने के लिए असाधारण गुणों वाले कई प्रतिष्ठित नेता हैं।"

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