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लोकसभा चुनाव 2019: नोटबंदी के बाद 'रोडबंदी' से जम्मू कश्मीर में मचा बवाल!

By सुरेश डुग्गर | Updated: April 7, 2019 17:04 IST

नेशनल कांफ्रेंस के प्रधान फारूक अब्दुल्ला, उपप्रधान उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल प्रशासन के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। फारूक ने कहा कि व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर कहा कि राजमार्ग पर इस तरह की रोक से कारोबार चौपट हो जाएगा।

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ठळक मुद्देरविवार सुबह पांच बजे के बाद ही ऊधमपुर से आगे निजी वाहनों को जाने की इजाजत नहीं दी गई। बारामुला से ऊधमपुर की ओर भी आने वाले सभी निजी वाहनों पर रोक लगाई गई।

देशभर में नोटबंदी के कारण जो बवाल मचा था वैसा ही बवाल एक बार फिर कश्मीर में अब ‘रोडबंदी’ के कारण मचा हुआ है। हालत यह है कि जम्मू कश्मीर के लोगों को सुरक्षा के नाम पर अपनी ही सड़कों का इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा है। इस फैसले की सर्वत्र निंदा हो रही है जिसे सामूहिक सजा के तौर पर लिया जा रहा है।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले को सुरक्षित माहौल उपलब्ध करवाने के लिए आज से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऊधमपुर से बारामुल्ला तक निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। केवल सुरक्षाबलों के वाहनों को ही जाने की इजाजत है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है तो उन्हें जाने की अनुमति की बात तो की जा रही है पर वह हकीकत में कहीं नजर नहीं आई है। यह रोक अगले दो महीनों तक सप्ताह में दो दिन रविवार और बुधवार को रहेगी।

रविवार सुबह पांच बजे के बाद ही ऊधमपुर से आगे निजी वाहनों को जाने की इजाजत नहीं दी गई। इसी तरह बारामुला से ऊधमपुर की ओर भी आने वाले सभी निजी वाहनों पर रोक लगाई गई। सिर्फ सुरक्षाबलों के वाहनों को ही जाने दिया गया। ऊधमपुर से बारामुला तक के 270 किलोमीटर लंबे राजमार्ग में जंगह-जगह पर पुलिस को तैनात किया गया था। इसके अलावा चिनैनी से ऊधमपुर के बीच मजिस्ट्रेट को तैनात किया गया था। नाशरी, बनिहाल, चंद्रकोट, गूल में मजिस्ट्रेट के अलावा पुलिस अधिकारी भी तैनात किए गए थे। जगह जगह राजमार्ग पर मोबाइल टीमें भी तैनात की गई थीं।

राजमार्ग पर निजी वाहनों के रोक लगाए जाने के कारण लोग परेशान हैं। कई लोगों को पैदल ही राजमार्ग पर जाते हुए देखा जा रहा है। कश्मीर में कई राजनीतिक दलों की रैलियों में भी भाग लेने के लिए लोग नहीं पहुंच पा रहे हैं। लोगों ने प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना की।

वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कि विवाह समारोह के चलते राजमार्ग पर सफर करने वाले थे, उन्हें इसके लिए विशेष इजाजत लेनी पड़ रही है। न्यू काजी अनंतनाग के दानिश अली को विवाह समारोह में डोडा आना था, उन्हें आने के लिए इजाजत लेनी पड़ी। इस तरह अन्य कई लोग भी हे। वहीं जम्मू के डिवीजनल कमिश्नर संजीव वर्मा ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या फिर अन्य जरूरी काम है तो उसे जांच के बाद जाने की इजाजत दी जाएगी।

राज्यपाल प्रशासन के इस फैसले का कश्मीर में भारी विरोध हो रहा है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफती ने कहा कि वह जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऊधमपुर से बारामुला तक निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मसले को लेकर राजनीति कर रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों का जम्मू-कश्मीर है। यहां की सडके हमारी हैं और जब हमारा मन करेगा हम इनका इस्तेमाल करेंगे।

नेशनल कांफ्रेंस के प्रधान फारूक अब्दुल्ला, उपप्रधान उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल प्रशासन के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। फारूक ने कहा कि व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर कहा कि राजमार्ग पर इस तरह की रोक से कारोबार चौपट हो जाएगा। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी राज्यपाल प्रशासन के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे इस आदेश को नहीं मानेंगे और इसका उल्लंघन करेंगे। इसके बाद पीडीपी ने स्थानीय लोगों के साथ श्रीनगर में प्रदर्शन भी किया। वहीं पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने भी इस रोक की आलोचना की है।

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