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पहली बार सर्विस वोटर्स के लिए लागू की गई ये नई प्रणाली, इसके पीछे है खास वजह

By रामदीप मिश्रा | Updated: April 24, 2019 11:59 IST

लोकसभा आम चुनाव में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सर्विस वोटर्स को पहले डाक से मतपत्र भेजे जाते थे, जिनसे उनकी मतदान में पूर्ण भागीदारी नहीं हो पाती थी।

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लोकसभा चुनाव 2019 में पहली बार राजस्थान के एक लाख 36 हजार 595 सर्विस वोटर्स को मतदान के लिए इलेक्ट्रोनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट्स (ईटीपीबीएस) जारी किए गए। पहले चरण की 13 लोकसभा सीटों के लिए 25 हजार, 840 और दूसरे चरण की 12 सीटों के लिए 1 लाख, 10 हजार, 755 सर्विस वोटर्स के लिए ऑनलाइन बैलेट पेपर्स भेजे गए हैं।

लोकसभा आम चुनाव में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सर्विस वोटर्स को पहले डाक से मतपत्र भेजे जाते थे, जिनसे उनकी मतदान में पूर्ण भागीदारी नहीं हो पाती थी। इस व्यवस्था में सुधार के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने ईटीपीबीएस प्रणाली लागू की है। इससे ऑनलाइन बैलेट भेजे जाते हैं, ताकि मतदान प्रक्रिया में लगने वाला समय आधा रह जाए। नई व्यवस्था के बाद सर्विस वोटर्स के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी होने की खासी संभावना है।  

पहले चरण में लोकसभा क्षेत्र टोंक-सवाईमाधोपुर में 2324, अजमेर में 3530, पाली में 4889, जोधपुर में 5362, बाड़मेर में 2212, जालौर में 345, उदयपुर में 261, बांसवाड़ा में 170, चितौड़गढ़ में 540, राजसमंद में 3570, भीलवाड़ा में 1465, कोटा में 765 और झालावाड़-बारां में 407 सर्विस वोटर्स हैं। 

वहीं दूसरे चरण में श्रीगंगानगर में 1830, बीकानेर में 2193, चूरू में 8640, झुंझूनूं में 28995, सीकर में 16782, जयपुर ग्रामीण 9056, जयपुर में 1303, अलवर में 14906, भरतपुर में 9618, करौली-धौलपुर में 4917, दौसा में 3913 और नागौर में 8602 सर्विस वोटर्स के लिए ई-बैलेट पेपर्स जारी कर दिए गए हैं।  चुनाव आयोग के मुताबिक, इन मतदाताओं के लिए मतपत्र आयोग की सुरक्षित वेब पोर्टल पर अभ्यर्थियों की सूची तैयार होने के 24 घंटों के बाद संबंधित रिटर्निग अधिकारियों द्वारा सर्विस वोटर्सॉ के रिकॉर्ड आफिसरों को एक क्लिक पर भेज दिए गए हैं। सर्विस मतदाता रिकॉर्ड ऑफिस से ई-डाक मतपत्र प्राप्त कर अपना वोट रिकॉर्ड कर इसे डाक द्वारा वापस संबंधित रिर्टनिंग ऑफिसर को भेजेंगे। इस प्रकार डाक मतदान की यह यात्रा सिंगल क्लिक पर आधे से भी कम समय में पूरी हो सकेगी। 

ई-बैलेट की तकनीकी सुरक्षा के लिए इसमें विशेष क्यूआर कोड मुद्रण की भी विशेष व्यवस्था की गई है। अब से पहले यह व्यवस्था दोनों तरफ डाक द्वारा की जाती थी।

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