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लोकसभा चुनावः पर्दे के नायक और राजनीति के पुराने खिलाड़ी के बीच मुकाबला, जानिए कौन किस पर भारी

By सतीश कुमार सिंह | Updated: May 16, 2019 15:22 IST

गुरदासपुर सीट पर जाखड़ और देओल के अलावा आम आदमी पार्टी के पीटर मसीह और पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के लाल चंद भी मैदान में हैं। गुरदासपुर सीट में कुल 15.95 लाख मतदाता 19 मई को लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में मतदान करेंगे। मतगणना 23 मई को होगी। 

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ठळक मुद्देभाजपा ने गुरदासपुर में ‘सेलेब्रिटी कार्ड’ खेला था और वह 1998 में इस सीट से विनोद खन्ना को उतारकर कांग्रेस की नेता एवं पांच बार की सांसद सुखबंस कौर भिंडर को हराने में सफल रही थी। भाजपा इस बार लोकसभा चुनाव में देश की सुरक्षा को अहम चुनावी मुद्दा बनाकर मैदान में उतरी है।

राजनीति के पुराने खिलाड़ी एवं कांग्रेस के मौजूदा सांसद सुनील जाखड़ के सामने भाजपा उम्मीदवार एवं फिल्मों में शानदार अभिनय से सिनेप्रेमियों के दिलों में जगह बनाने वाले सनी देओल की चुनौती ने गुरदासपुर लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है।

भाजपा इस बार लोकसभा चुनाव में देश की सुरक्षा को अहम चुनावी मुद्दा बनाकर मैदान मे उतरी है। ऐसे में ‘बॉर्डर’ एवं ‘गदर-एक प्रेम कथा’ जैसी देशभक्ति पर आधारित फिल्मों में अभिनय के लिए लोकप्रिय देओल को उम्मीदवार बनाना पार्टी की रणनीति में फिट बैठता है।

अभिनेता कभी ‘गदर’ के एक प्रसिद्ध दृश्य की तरह नलका पकड़कर अपनी लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं , तो कभी फिल्मों में अपने प्रसिद्ध संवादों ‘‘ढाई किलो का हाथ’’ (दामिनी) और ‘‘हिंदुस्तान जिंदाबाद है, जिंदाबाद रहेगा’’ (गदर) के जरिए मतदाताओं को लुभाने का प्रयत्न कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देओल के साथ एक तस्वीर ट्वीट करके ‘‘हिंदुस्तान जिंदाबाद...’’संवाद का प्रयोग किया गया था। देओल के पिता एवं जाने माने अभिनेता धर्मेंद्र भी अपने बेटे के लिए प्रचार कर रहे हैं। विपक्ष यह कह कर देओल पर निशाना साध रहा है कि उन्हें पंजाब की समस्याओं की कोई जानकारी नहीं है और वह बाहरी व्यक्ति हैं।

पहले भी भाजपा ने गुरदासपुर में ‘सेलेब्रिटी कार्ड’ खेला था

ऐसे में देओल ने अपने आलोचकों को चुप कराने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘मेरे बारे में जो कहा जा रहा है, मैं उसका जवाब देने के लिए यहां नहीं हूं। मैं यहां काम करने और लोगों की सेवा करने आया हूं।’’ इससे पहले भी भाजपा ने गुरदासपुर में ‘सेलेब्रिटी कार्ड’ खेला था और वह 1998 में इस सीट से विनोद खन्ना को उतारकर कांग्रेस की नेता एवं पांच बार की सांसद सुखबंस कौर भिंडर को हराने में सफल रही थी। खन्ना के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जाखड़ (64) ने यह सीट जीती थी।

देओल एक जाट सिख हैं और उनका वास्तविक नाम अजय सिंह देओल है। उनके पहले रोड शो में भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे, लेकिन जाखड़ उनसे खास प्रभावित नहीं हैं। जाखड़ ने कहा, ‘‘देओल ने अभी तक डायलॉग (संवाद) बोलने के अलावा कुछ नहीं किया और यहां मतदाता इसी बात को लेकर चिंतित है।’’

उन्होंने भरोसा जताया कि वह अपनी विकास परियोजनाओं के बल पर जीतेंगे। उन्होंने करतारपुर साहिब गलियारे में कांग्रेस का योगदान लोगों को याद दिलाया। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि भाजपा देओल की लोकप्रियता के बल पर भले ही जीत के लिए आश्वस्त हो लेकिन यह इतना आसान नहीं है।

गुरदासपुर सीट पर जाखड़ और देओल के अलावा आम आदमी पार्टी के पीटर मसीह और पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के लाल चंद भी मैदान में हैं। गुरदासपुर सीट में कुल 15.95 लाख मतदाता 19 मई को लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में मतदान करेंगे। मतगणना 23 मई को होगी। 

गुरदासपुर संसदीय क्षेत्र में गुरदासपुर और पठानकोट दो जिले आते हैं

इस संसदीय क्षेत्र में गुरदासपुर और पठानकोट दो जिले आते हैं। दोनों जिलों की सीमाएं पाकिस्तान से लगती हैं। पूरे संसदीय क्षेत्र में विकास की कमी, उद्योगों का अभाव और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दा होने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद भी मुद्दा है।

स्थानीय लोग दीनानगर थाने और पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन परिसर पर हुए आतंकी हमलों को नहीं भूले हैं। नशे की समस्या भी है लेकिन बेअदबी चुनावी चर्चा में नहीं है। गुरदासपुर के बटाला में फल की दुकान चलाने वाले मुकद्दर कहते हैं कि एक बार मोदी फिर प्रधानमंत्री बन जाएं तो जम्मू-कश्मीर की समस्या ही खत्म हो जाएगी। वह खुद ही सवाल करते हैं कि अब यह बताने की जरूरत तो नहीं कि मैं वोट किसे दूंगा।

पठानकोट में भाजपा काफी मजबूत है, लेकिन यहां सिर्फ तीन विधानसभा सीटें हैं

22 अप्रैल को भाजपा में शामिल होने वाले सनी कोई सियासी भाषण नहीं देते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें राजनीति नहीं आती, लेकिन काम करके दिखाएंगे। पठानकोट में भाजपा काफी मजबूत है, लेकिन यहां सिर्फ तीन विधानसभा सीटें हैं।

पठानकोट में कांग्रेस ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के लिए अधिक चुनौती गुरदासपुर में है, जहां छह विधानसभा सीटें हैं और इनमें भी डेरा बाबा नानक सीट पर कांग्रेस काफी मजबूत है। इसके अलावा सुनील जाखड़ काफी पहले से प्रचार कर रहे हैं और अधिक क्षेत्र उन्होंने कवर कर लिया है जबकि सनी देयोल अभी सभी विधानसभा क्षेत्रों में रोड शो भी नहीं कर पाए हैं, लोगों से मिलना तो दूर की बात है।

कुल नौ विधानसभा सीटों में भाजपा व शिअद का एक-एक और सात पर कांग्रेस का कब्जा है

कुल नौ विधानसभा सीटों में भाजपा व शिअद का एक-एक और सात पर कांग्रेस का कब्जा है। अधिकतर पंचायतों पर भी कांग्रेस समर्थित सरपंच होने से जाखड़ ग्रामीण क्षेत्रों में राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनके भाषणों में साफ झलकता है कि सनी का स्टारडम चुनौती पेश कर रहा है। जाखड़ कहते हैं, मैं डॉयलाग नहीं बोल सकता, मैं डांस नहीं करता, यदि इसे लेकर किसी को मुझसे नाराजगी है तो मुझे वोट न दे।

भाजपा सनी देयोल के स्टारडम के बल पर यह सीट फिर से हथियाना चाहती है। सनी को जिताने के लिए अकाली दल भी जी-जान से लगा हुआ है। कांग्रेस के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है क्योंकि जाखड़ प्रदेश अध्यक्ष हैं। सनी देयोल के पिता अभिनेता धर्मेंद्र भी दो दिन से सभाएं कर रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं।

हालांकि धर्मेंद्र सनी के साथ रोड शो में तो दिखाई नहीं दिए, लेकिन अलग-अलग इलाकों में वह छोटी-छोटी सभाएं कर लोगों से मिल रहे हैं। वह यही कहते हैं कि उनका पंजाब से बहुत लगाव है। बेटे को सेवा करने का मौका दें, निराश नहीं करेंगे।

सनी के प्रचार का स्टाइल रोड शो है। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए करीब 40 डिग्री तापमान में दो-दो घंटे इंतजार करते हैं। जनता की बेहद मांग पर वह हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा..., जब ये ढाई किलो का हाथ पड़ता है तो आदमी उठता नहीं.. उठ जाता है..., तारीख पे तारीख... जैसे अपने लोकप्रिय फिल्मी डायलॉग सुनाते हैं।

उनकी दमदार आवाज, जोशीला अंदाज और शर्मीला स्वभाव जनता को भाता है। खासकर युवाओं को। करीब डेढ़ लाख युवा वोटर हैं, जो सनी की राह आसान कर सकते हैं। लिहाजा सनी युवाओं की बात अधिक करते हैं। कहते हैं- खेलों को बढ़ावा देना है, युवाओं को रोजगार देना है, किसानों की समस्या दूर करनी है और क्षेत्र का विकास करना है। बस आप लोग मेरा साथ दें।

कांग्रेस के सुनील जाखड़ अनुभवी राजनेता हैं। उनके पिता बलराम जाखड़ केंद्रीय मंत्री और लोकसभा के स्पीकर थे। सुनील पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। विनोद खन्ना के निधन के बाद करीब डेढ़ साल पहले हुए उपचुनाव में उन्होंने करीब दो लाख वोटों से जीत हासिल की थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदली हुई हैं।

 

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