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पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा: 5 सालों से लगातार आमने-सामने हैं अमित शाह-ममता बनर्जी, जानें पूरा मामला

By निखिल वर्मा | Updated: May 15, 2019 15:04 IST

हिन्दी पट्टी के सभी राज्यों में परचम लहरा चुकी बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन बनाने के लिए लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से ही लगी हुई है। खुद अमित शाह कई बार कह चुके हैं, जब तक पश्चिम बंगाल और केरल में पार्टी की सरकार नहीं बन जाती, बीजेपी का लक्ष्य अधूरा है।

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ठळक मुद्देपश्चिम बंगाल में ममता सरकार से मोदी सरकार से तनातनी की शुरुआत अक्टूबर 2014 में हुई थी।ममता बनर्जी मोदी सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाती रही हैं।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के लिए राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ‘‘मूक दर्शक’’ बना हुआ है। 

शाह ने यह भी कहा कि मंगलवार को जब कोलकाता में उनके काफिले पर कथित हमला किया गया, तब वह सीआरपीएफ की सुरक्षा के बिना, सकुशल बच कर नहीं निकल पाते। बीजेपी ने आरोप लगाया कि सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही चुनावी हिंसा हो रही है और इसके पीछे टीएमसी का हाथ है।

हिन्दी पट्टी के सभी राज्यों में परचम लहरा चुकी बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन बनाने के लिए लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से ही लगी हुई है। खुद अमित शाह कई बार कह चुके हैं, जब तक पश्चिम बंगाल और केरल में पार्टी की सरकार नहीं बन जाती, बीजेपी का लक्ष्य अधूरा है। पश्चिम बंगाल में ममता सरकार से मोदी सरकार से तनातनी की शुरुआत अक्टूबर 2014 में हुई थी।

जानिए कब-कब हुआ बीजेपी-टीएमसी में टकराव

बर्धमान ब्लास्ट में सियासत

पश्चिम बंगाल के बर्धमान में एक बम ब्लास्ट में दो लोगों की मौत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी। कुछ दिनों बाद ही मोदी सरकार ने इसकी जांच का जिम्मा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) को दे दिया था। 

उस समय बर्धवान विस्फोट से निपटने में अपनी सरकार की आलोचना का सामना कर रही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि एनआईए की जांच से उन्हें कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि ‘आतंकवादी तो आतंकवादी हैं’ लेकिन उन्‍होंने सिर्फ इतना चाहा था कि केंद्र कोई फैसला करने से पहले राज्य से मशविरा करे। ममता ने राज्य सरकार को सूचित किए बगैर स्वत: ही एनआईए को दिए जाने के केंद्र के फैसले पर ऐतराज जताया था।

शारदा घोटाला

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले पश्चिम बंगाल में शारदा चिटफंड घोटाला सामने आया था। शुरुआत में इसकी जांच कोलकाता पुलिस ने की थी। पश्चिम बंगाल पुलिस की एसआईटी टीम की अगुआई 2013 में राजीव कुमार ने की थी। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को इसकी जांच करने का आदेश दिया था। 

बीजेपी का आरोप है कि ममता बनर्जी के करीबियों ने शारदा घोटाले को अंजाम दिया है और लोगों से हड़पा गया धन टीएमसी को मिला है। शारदा घोटाले में गिरफ्तार होने वाले टीएमसी के राज्यसभा सांसद कुणाल घोस पहले टीएमसी नेता थे, जिन्हें नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया।  अमित शाह की रैली को मिली कोर्ट से इजाजत

बीजेपी अध्यक्ष 30 नवंबर 2014 को कोलकाता में एक रैली करना चाहते थे, लेकिन ममता सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी। ममता सरकार के विरोध के बावजूद हाईकोर्ट ने कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली को इजाजत दी थी। रैली की इजाजत के लिए बीजेपी को तीन बार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।

अमित शाह ने कोलकाता में हुई रैली में कहा था कि शारदा चिटफंड के पैसे का इस्तेमाल दो अक्टूबर के बर्धमान विस्फोट में किया गया। इसके अलावा शाह ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी पर बर्धमान विस्फोट मामले की एनआईए जांच में बाधा डाल रही हैं। ऐसा इस घटना में कथित तौर पर शामिल तृणमूल नेताओं को बचाने के लिए किया जा रहा है।

नारद स्टिंग विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय नारद न्यूज पोर्टल ने कई सारे वीडियो अपलोड किए थे, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को एक फर्जी कंपनी का पक्ष लेने के बदले रुपये स्वीकारते देखा गया था। इस मामले में अप्रैल 2017 में सीबीआई ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 13 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अपरुपा पोद्दार का नाम भी प्राथमिकी में शामिल है। सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में शामिल लोगों में तत्कालीन तृणमूल के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य मुकुल रॉय, लोकसभा सदस्य सौगत रॉय, सुल्तान अहमद, काकली घोष दस्तिदार, राज्य के मंत्री सुब्रत मुखर्जी, फरहाद हकीम, शहर के मेयर और राज्य के मंत्री सोवन चटर्जी व पूर्व मंत्री मदन मित्रा के नाम शामिल हैं। 

बता दें कि सीबीआई ने ये केस कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की थी। टीएमसी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन शीर्ष कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया था।

रोजवैली घोटाला

रोजवैली चिटफंड घोटाले के सिलसिले में तो टीएमसी के दो सांसदों सुदीप बनर्जी और तापस पाल को महीनों जेल में रहना पड़ा था। रोजवैली चिटफंड घोटाले में रोजवैली ग्रुप ने लोगों 2 अलग-अलग स्कीम का लालच दिया और करीब 1 लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया था। यह घोटाला करीब 15 हजार करोड़ रुपये का बताया जाता है।

ममता ने लगाई सीबीआई पर रोक

शारदा चिटफंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार सीबीआई जांच के घेरे में हैं। फरवरी, 2019 में जब सीबीआई की टीम कोलकाता पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार से पूछताछ के लिए पहुंची तो वहां काफी ड्रामा हुआ। केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार राजीव कुमार ने इन घोटालों की जांच कर रहे पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष जांच दल का नेतृत्व किया था और वह एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिये भेजे नोटिसों का जवाब नहीं दे रहे हैं। 

बाद में कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को राजीव कुमार से पूछताछ की इजाजत मिली। बता दें कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में सीबीआई की इंट्री पर रोक लगाया हुआ है। 

केंद्र पर भड़कीं ममता

ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल समेत तमाम दिग्गज नेता शुरू से ही मोदी सरकार पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) समेत तमाम एजेंसियों को सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाने के आरोप लगाते रहे हैं। शारदा और रोज वैली घोटाले में नाम आने के चलते टीएमसी के कई बड़े नेताओं को या तो जेल की हवा खानी पड़ी या सीबीआई पूछताछ में फंसना पड़ा।

बार-बार सीबीआई पूछताछ के चलते ममता के दाहिने हाथ माने जाने वाले मुकुल रॉय ने तो आखिर में बीजेपी का ही दामन लिया। इसके अलावा एक अन्य राज्यसभा सदस्य सृंजय बसु ने तो राजनीति को ही अलविदा कह दिया।

लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी के शीर्ष नेताओं को आकलन है कि इस बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी का आंकड़ा दो अंकों में पहुंचेगा। बीजेपी नेता अक्सर ये सुनते कहते पाएं जाते हैं कि बिहार-यूपी में होने वाले नुकसान को पश्चिम बंगाल-ओडिशा में पूरा कर लेंगे। अब नतीजे आने के में सिर्फ 8 दिन ही शेष है, देखना है कि पश्चिम बंगाल में ममता अडिग रहेगी या बीजेपी उनका किला ध्वस्त कर देगी।

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