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लालू प्रसाद यादव की तबीयत में सुधार नहीं, रिम्स में मिलने पहुंचे तेजस्वी  

By एस पी सिन्हा | Updated: September 30, 2018 02:57 IST

पिता से मिलने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि रिम्स में इलाज के बावजूद लालू यादव की तबीयत में सुधार नहीं है। स्वास्थ्य में स्थिरता नहीं आ रही है।

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रांची,30 सितंबर: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व नेता विरोधी दल तेजस्वी यादव ने आज रांची के रिम्स में अपने पिता राजद प्रमुख लालू यादव से मुलाकात की। राजद प्रमुख से मिलने के बाद तेजस्वी यादव ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रिम्स में इलाज करा रहे पापा की तबीयत ठीक नहीं है।

पिता से मिलने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि रिम्स में इलाज के बावजूद लालू यादव की तबीयत में सुधार नहीं है। स्वास्थ्य में स्थिरता नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं और लालू यादव के समर्थक भी चाहते हैं वो जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं। यहां बता दें कि लालू यादव चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता हैं और तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से रांची के रिम्स में उनका इलाज चल रहा है।

डॉक्टरों का कहना है कि उनका शुगर लेवल कम नहीं हो रहा है। हालांकि डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। लालू यादव को तीन टाइम इंसुलिन दिया जा रहा है। सुबह इंसुलिन का 40 डोज, दोपहर को 6 डोज तो शाम को 16 डोज दिए जाने के बावजूद फिलहाल हालत स्थिर बनी हुई है। वहीं, सूत्रों की मानें तो लालू यादव बतौर पिता अपने दोनों लडकों को लेकर चिंतित हैं। राजद प्रमुख लालू यादव अपने छोटे बेटे और पार्टी के नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात के दौरान उनके बडे भाई तेज प्रताप के बीच खटपट की चर्चा हुई।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक लालू यादव ने बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती को भी मिलने का संदेशा भिजवाया है। लालू की कोशिश है कि अगले साल लोकसभा चुनाव और उसके अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी मजबूत रहे। उन्हें मालूम है कि बेटों के बीच की खाई राजद में बिखराव पैदा कर सकती है।

लालू न सिर्फ पारिवारिक मसलों पर बात किया बल्कि 2019 लोकसभा चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा किया। माना जा रहा है कि टिकट बंटवारे को लेकर भी लालू अपने बेटों को सलाह दिया है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता डायरेक्ट लालू के टच में हैं और लगातार रांची का चक्कर लगाते रहे हैं। 27 अगस्त, 2017 को गांधी मैदान की रैली में तेज प्रताप ने खुद को कृष्ण बताते हुए बडे भाई तेजस्वी का सारथी बनने की घोषणा नहीं बल्कि गर्जना की थी।

ये तेज प्रताप के फेमस शंखनाद के बीच हुआ। लेकिन जैसे-जैसे तेजस्वी ने सांगठनिक फैसले लेने शुरू किए, तेज प्रताप की नाराजगी कई मौकों पर सामने आ गई। पहला बडा मामला तेज के एक चहेते नेता राजेंद्र पासवान को पार्टी में ओहदा नहीं बढाने पर सामने आया। जब ऐसा नहीं हुआ तो तेज ने ट्वीट कर लिखा, "हम अर्जुन को हस्तिनापुर की गद्दी सौंप कर खुद द्वारका जाना चाहते हैं।

पांच जुलाई को पार्टी की स्थापना दिवस पर तेज प्रताप ने कई वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक तौर पर झिडकी दी थी और कहा था, जब तेजस्वी दिल्ली जाएगा तो यहां बागडोर हम ही संभालेंगे। यही नहीं पिछले महीने राबडी देवी के आवास पर हुई पार्टी की बैठक में तेज प्रताप नहीं पहुंचे और जहां बैठक थी, वहीं गाडी पार्क कर गायब हो गए।

टॅग्स :लालू प्रसाद यादव
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