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लालू यादव के फिलहाल जेल से बाहर आने की उम्मीदों पर फिरा पानी, जमानत पर सुनवाई 27 नवंबर तक टली

By एस पी सिन्हा | Updated: November 6, 2020 13:42 IST

लालू यादव को फिलहाल और कुछ दिन जेल में रहना होगा. दुमका कोषागार से जुड़े मामले में उनकी जमानत पर सुनवाई टल गई है. सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट से और समय मांगा था, जिस पर कोर्ट ने सहमति जता दी.

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ठळक मुद्देलालू प्रसाद यादव के जमानत पर सुनवाई 27 दिसंबर तक के लिए टली, सीबीआई को जवाब के लिए कोर्ट ने दिया समयलालू को अब तक चारा घोटाले से जुड़े तीन मामलों में झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिली चुकी है

पटना: चारा घोटाला मामले में रांची जेल में सजा काट रहे राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को जेल से बाहर आने के लिए फिलहाल और लंबा इंतजार करना पड़ेगा. उनके दुमका कोषागार से जुड़े मामले में जमानत पर सुनवाई टल गई है. अब सुनवाई 27 नवंबर को होगी.

ऐसे में लालू प्रसाद यादव की दिवाली और छठ इस बार भी जेल में ही बितेगी. झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करने के लिए सीबीआई ने अदालत से समय की मांग की है.   

प्राप्त जानकारी के अनुसार सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट से और समय मांगा था. जिस पर कोर्ट ने आज की सुनवाई टालते हुए अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर का वक्त निर्धारित किया है. 

बता दें कि दुमका कोषागार से जुड़े मामले में लालू प्रसाद यादव की झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी. माना यह जा रहा था कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर आज उन्हें जमानत मिल सकती है. लालू प्रसाद यादव को जमानत मिल जाती तो वो जेल के बाहर आ सकते थे. 

हालांकि, सीबीआई की ओर से बताया गया कि लालू प्रसाद यादव के दावों पर वह जवाब दाखिल करेगी. इसके लिए उसे समय चाहिए. इस आग्रह को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने सीबीआई को 24 नंबर तक का समय दिया और सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित कर दी.

लालू यादव की ओर से दी गई थी क्या दलील

जमानत याचिका में लालू प्रसाद यादव की ओर से कहा गया है कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में आधी सजा वह पूरी कर चुके हैं. इस मामले में वह पटना में भी जेल में रहे है. पटना में उन्होंने 10 महीने जेल में बिताया है. रांची में 10 दिसंबर 2017 से वह जेल में है. अब तक उन्होंने 42 महीने से अधिक सजा काट ली है. 

चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव को अब तक चाईबासा कोषागार से अवैध निकसी के दो और देवघर कोषागार से अवैध निकासी के एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिली चुकी है. अब सिर्फ दुमका मामले में जमानत मिलनी बाकी है. अगर इस मामले में उन्हें जमानत की सुविधा मिलती है, तो वे जेल से रिहा हो जाएंगे. 

झारखंड में लालू पर चल रहे हैं पांच मामले

लालू प्रसाद यादव पर कुल पांच मामले झारखंड में चल रहे हैं, जिसमें से उन्हें चाईबासा के दो, देवघर व दुमका के एक-एक मामले में सजा मिली है. वहीं, डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले में अभी निचली अदालत में सुनवाई चल रही है. दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए 7 साल की सजा दी है. 

सजा के दौरान इलाज के लिए लालू को रांची में रिम्स के केली बंगले में रखा गया है. लालू की ओर से याचिका में बताया गया है कि आधी सजा पूरी कर ली गई है, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए. इसके अलावा उन्होंने अपनी बीमारी का भी हवाला दिया है;

इससे पहले लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि कुल सजा का आधा हिस्सा काट लिए जाने को आधार बताते हुए जमानत अर्जी दी गई थी. पिछले महीने झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला से जुडे चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में नियमित जमानत दी थी. 

चारा घोटाले के पांच में चार मामलों में लालू दोषी

चारा घोटाले के दोषी लालू यादव 5 में से 4 मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं. लेकिन इन 4 मामलों में से 3 में उन्हें जमानत मिल चुकी है. लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले के पांचवें मामले में सुनवाई चल रही है. ये मामला डोरंडा कोषागार से अवैध रूप से 139 करोड रुपये की निकासी का है. 

सीबीआई के विशेष अदालत से दुमका कोषागार से 3 करोड 13 लाख की अवैध निकासी मामले 7-7 साल की सजा दो अलग-अलग धराओं में लगाई थी और इसके अलावा 60 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था. 

झारखंड हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

लालू प्रसाद यादव के रिम्स में इलाज के दौरान पिछले तीन माह में उनसे मिलने वाले लोगों की सूची और जेल मैनुअल के पालन पर रिपोर्ट नहीं दिए जाने पर भी झारखंड हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है.

न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने राज्य के कारा महानिरीक्षक और बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक को शो कॉज करते हुए यह बताने को कहा है कि अदालत के आदेश के बाद भी यह जानकारी क्यों नहीं दी गई. जबकि अदालत के आदेश की कॉपी उन्हें समय पर उपलब्ध करा दी गई है. 

27 नवंबर को दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का निर्देश कोर्ट ने दिया है. पूर्व में सुनवाई करते हुए अदालत ने रिम्स से लालू प्रसाद यादव की मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी. साथ ही कारा महानिरीक्षक और जेल आइजी से लालू के मुलाकातियों की सूची देने को कहा गया था. 

यह भी बताने को कहा गया था कि जेल मैनुअल के नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं? रिम्स की ओर से मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध करा दी गई, लेकिन जेल आइजी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई.

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