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Kurhani assembly by-election 2022: क्या कुढ़नी में भी सत्तारूढ़ गठबंधन को मिलेगी हार, एआईएमआईएम और बसपा बिगाड़ सकते है खेल

By शरद गुप्ता | Updated: November 22, 2022 18:44 IST

Kurhani assembly by-election 2022: गोपालगंज उपचुनाव में गठबंधन के प्रत्याशी से भाजपा उम्मीदवार महज 1794 वोटों से जीता. एआईएमआईएम उम्मीदवार को 12214 और बसपा उम्मीदवार को 8854 वोट मिले थे.

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ठळक मुद्देअसदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और पूर्व राज्य मंत्री मुकेश साहनी की वीआईपी पार्टी के उम्मीदवारों की होगी. विधानसभा क्षेत्र में भूमिहार और मल्लाहों की अच्छी खासी आबादी है.भाजपा- जदयू सरकार में मंत्री रहे मुकेश साहनी अब भाजपा के खिलाफ हो गए हैं.

Kurhani assembly by-election 2022: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की कुढ़नी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में राजद-जदयू महागठबंधन के सामने  गोपालगंज जैसी हार से बचने की चुनौती है. इसी महीने हुए गोपालगंज उपचुनाव में गठबंधन के प्रत्याशी से भाजपा उम्मीदवार महज 1794 वोटों से जीता.

 

एआईएमआईएम उम्मीदवार को 12214 और बसपा उम्मीदवार को 8854 वोट मिले थे. इसीलिए कुुढ़नी में भाजपा के उम्मीदवारों से कहीं ज्यादा अहम भूमिका असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और पूर्व राज्य मंत्री मुकेश साहनी की वीआईपी पार्टी के उम्मीदवारों की होगी. इस विधानसभा क्षेत्र में भूमिहार और मल्लाहों की अच्छी खासी आबादी है.

कभी भाजपा- जदयू सरकार में मंत्री रहे मुकेश साहनी अब भाजपा के खिलाफ हो गए हैं. वे खुद मल्लाह है और उनकी पार्टी ने प्रतिष्ठित पत्रकार नीलाभ कुमार को टिकट दिया है जो खुद भूमिहार हैं. वहीं दूसरी ओर अल्पसंख्यकों के हितरक्षक होने का दम भरने वाली एआईएमआईएम ने मोहम्मद गुलाम मुर्तजा को टिकट दिया है. 

जदयू नेताओं का दावा है कि कुढ़नी के नतीजे गोपालगंज से अलग होंगे. वहां राजद का प्रत्याशी था और यहां जदयू का. वहां एआईएमआईएम प्रत्याशी को मिले वोटों की बजह दरअसल राजद नेता और पूर्व माफिया शहाबुद्दीन से लोगों की नाराजगी थी. वहीं बसपा के टिकट पर लाल लालू यादव के साले और वर्तमान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के मामा साधु यादव की पत्नी इंदिरा देवी लड़ रही थी. 

इसलिए होगा अलग

कुढ़नी में ना तो लालू यादव के परिवार की अंदरूनी लड़ाई है और न ही शहाबुद्दीन से नाराजगी जैसा मुद्दा है. साथ ही मुकेश साहनी की पार्टी और उम्मीदवार भाजपा के भूमिहार और मल्लाह वोटों में सेंध लगा सकते हैं. इसके लिए जदयू को यहां के नतीजे गोपालगंज से अलग आते दिख रहे हैं.

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