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#KuchhPositiveKarteHain: कारगिल की दिशा बदलने में जुटे 'जोशीले' युवाओं की दिलचस्प कहानी

By विनीत कुमार | Updated: August 6, 2018 16:03 IST

कारगिल की समृद्ध विरासत और स्थानीय परंपरा और भाषा को बचाने और इसके प्रचार-प्रसार में भी यह ग्रुप जुटा हुआ है।

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कारगिल का नाम जेहन में आते ही सबसे पहला ख्याल उस युद्ध का आता है, जिसमें हमारे कई बहादुर सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी। उस जंग के 19 साल गुजर जाने के बावजूद अब भी कारगिल अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात की बहस के बीच में आ ही जाता है। हालांकि, ये पूरा सच नहीं है। 

दुर्भाग्यपूर्ण युद्ध का दंश लिए कारगिल की पहचान केवल जंग तक सीमित नहीं है। यहां की समृद्ध संस्कृति और खूबसूरत वादियों का भी एक अलग महत्व है और इसी पहचान को देश-दुनिया में फैलाने में यहां कुछ युवा पिछले कुछ सालों से जुटे हैं। आईए, Lokmatnews.in के #KuchPositiveKarteHain के मुहिम में जानते हैं इन्हीं खास युवाओं के बारे में जो कारगिल की कहानी को युद्ध से आगे ले जाने में जुटे हैं।

नजूम अल हुदा ने शुरू की नई कोशिश

कारगिल से जुड़ी युद्ध की छवि बदलने की कोशिश का विचार सबसे पहले नजूम अल हुदा को आया। वे 25 साल के हैं पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने वी फॉर कारगिल (WFK) की स्थापना की और ग्रुप के साथ काम करने वाली सभी कॉलेज स्टूडेंट्स ही हैं। वेबसाइट 'द बेटर इंडिया' के अनुसार नजूम इससे पहले एक एनजीओ चरखा डेवलपमेंट कॉम्यूनिकेशन नेटवर्क से जुड़े थे। यह संस्था भारत के गांव में रहने वाले लोगों के सामाजिक और आर्थिक स्थिति को और बेहतर करने के लिए काम करती है।

यहीं से नजूम को WFK का ख्याल आया। नजूम ने सोचा कि क्यों न कारगिल के लोगों की बेहतरी के लिए कुछ किया जाए। इसके बाद WFK की नींव रखी गई और तब से यह ग्रुप स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा और पर्यटन से लेकर पर्यावरण के लिए काम कर रहा है। यह ग्रुप कारगिल में रहने वाले लोगों के जीवनस्तर की बेहतरी के लिए काम कर रहा है और स्थानिय तौर पर भी इसे खूब समर्थन मिल रहा है।

WFK कैसे बदल रहा है कारगिल के लोगों की जिंदगी

इस ग्रुप ने कई ऐसे कदम उठाये हैं, जिसने यहां के लोगों की जिंदगी में बदलाव की शुरुआत की है। इसमें एक है स्थानीय महिलाओं को वैकल्पिक रोजगार मुहैया कराना। इस ग्रुप ने स्थानीय ऊन से बने कपड़ों और वस्तुओं के उत्पादन में महिलाओं की मदद की और महिलाओं ने भी इसे हाथों-हाथ लिया। इससे एक फायदा ये भी हुआ स्थानीय महिलाओं के बीच जुड़ाव बढ़ा। 

इसके अलावा इस ग्रुप ने कुछ स्थानीय स्कूलों में कंप्यूटर भी दान किए ताकि इसका इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा में हो सके। इसके लिए WFK  के सदस्यों और वॉलिंटयर्स ने खुद पैसे जुटाये।  

कारगिल की समृद्ध विरासत और स्थानीय परंपरा और भाषा को बचाने और इसके प्रचार-प्रसार में भी यह ग्रुप जुटा हुआ है। इसके लिए 2014 में इस ग्रुप ने पर्यटन मंत्रालय और हस्तशिल्प विभाग की मदद से 'विजिट कारगिल टू प्रोमोट कारगिल' अभियान की शुरुआत भी की, जिसका मकसद क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना है।  

WFK का अभियान यहीं नहीं थमा है। वे दुनिया को बताना चाहते हैं कि युद्ध की कहानी पीछे रह गई है और ये जगह पूरी तरह सुरक्षित और समय बिताने लायक है। पूरे देश से WFK से जुड़ने के लिए लोग आगे बढ़ रहे हैं और ये भी सच है कि डर, सुरक्षा की चिंता और युद्ध की कहानी कई लोगों को आगे बढ़ने से रोक भी रही है। इन सबके बावजूद WFK का सफर जारी है और इन्हें उम्मीद है कि वे भविष्य में हर चुनौती से निपटने में कामयाब होंगे।

टॅग्स :कुछ पॉजिटिव करते हैंजम्मू कश्मीर समाचार
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