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कश्मीरी पंडितों ने ज्येष्ठ अष्टमी पर की मां क्षीर भवानी की आराधना, कश्मीर लौटने और अपनी मिट्टी से फिर से जुड़ने की प्रार्थना

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: June 18, 2021 15:39 IST

ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर अंततः प्रशासन ने कश्मीरी पंडितों को माता क्षीर भवानी मंदिर में पूजा अर्चना करने की अनुमति देने का खतरा मोल ले ही लिया।

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ठळक मुद्देकश्मीरी पंडितों ने ज्येष्ठ अष्टमी पर मां क्षीर भवानी की आराधना की। कश्मीर लौटने और अपनी मिट्टी से फिर से जुड़ने की प्रार्थना की। कोविड-19 के कारण ज्यादातर लोगों ने घरों में ही रहकर पूजा-अर्चना की। 

जम्मूः ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर अंततः प्रशासन ने कश्मीरी पंडितों को माता क्षीर भवानी मंदिर में पूजा अर्चना करने की अनुमति देने का खतरा मोल ले ही लिया। खीर, दूध और फूल चढ़ाकर कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की कामना की। कश्मीरी पंडित हर साल ज्येष्ठ अष्टमी के दिन माता के मंदिर पहुंचते हैं और आराधना करते हैं। समुदाय के लोगों का मानना है कि इसी दिन माता का जन्म हुआ था और इसलिए हर कश्मीरी पंडित इस दिन को श्रद्धा से मनाता है।

कोविड-19 प्रोटोकाल के बीच कश्मीर के जिला गांदरबल के तुलमुला गांव में स्थित मां खीर भवानी के दर्शनों को सैकड़ों कश्मीरी पंडित पहुंचे। एक कश्मीरी पंडित परिवार ने बताया कि कोरोना नियमों का पालन करते हुए माता खीर भवानी उत्सव मनाया। यहां देशभर से पहुंचे पंडितों ने मां भवानी से प्रार्थना की है कि वह पूरी दुनिया से इस महामारी का सफाया कर दें। इस वर्ष भी कोविड-19 के कारण गांदरबल स्थित खीर भवानी मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या में गिरावट नजर आई, लेकिन यहां जो सांप्रदायिक सद्भाव देखने को मिला है, वह अद्वितीय है। मां भवानी के दरबार में घाटी में रहने व देश के दूसरे राज्यों में रहने वाले काफी कश्मीरी पंडित पहुंचे हैं।

कोरोना काल में ज्यादातर पंडितों ने अपने अपने घरों मे ही रहकर माता की आराधना की या फिर नजदीक के मंदिर पहुंचकर माता की पूजा की। कश्मीरी पंडित महिलाओं ने दूध, खीर, फल, फूल से थाल सजाए और उनको कुंड में प्रवाहित कर कश्मीरी पंडितों की सुख शांति के लिए कामना की। वहीं कश्मीरी पंडितों ने माता खीर भवानी से दुआ मांगी कि शीघ्र उनकी कश्मीर वापसी हो, जिससे वे अपनी मिट्टी व अपनी संस्कृति से फिर जुड़ सकें।

आल इंडिया यूथ कश्मीरी समाज के कार्यकर्ता संजय रैना ने कहा कि इस बार अधिकांश कश्मीरी घाटी के तुलमुला में स्थित माता क्षीर भवानी के दर्शनों के लिए नहीं जा पाए हैं। पिछले दो साल से सरकारी यात्रा नही हो पा रही है। लिहाजा अधिकांश कश्मीरी पंडित घरों में या आसपास के मंदिरों में पहुंच कर माता की अराधना कर रहा है। लेकिन हर कश्मीरी पंडित के दिल में यह बात आज भी है कि वे अपने घर घाटी वापिस जाना चाहते हैं। ऐसा होने पर कश्मीरी पंडित तुलमुला में मां के दरबार में पहुंच कर आसानी से हाजिरी दे पाएंगे।

शादी लाल पंडिता ने बताया कि जगटी में कश्मीरी पंडित यहां पर बने मंदिर परिसर में पहुंचे और हवन यज्ञ किया व खुशहाली के लिए माता से प्रार्थना की। वहीं विरेंद्र रैना ने जानीपुरा में माता क्षीर भवानी मंदिर के दर्शन कर हर कश्मीरी पंडित की खुशहाली मांगी।जानकारी के लिए क्षीर भवानी मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मंदिर कश्मीर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। मां दुर्गा को समर्पित इस मंदिर का निर्माण एक बहती हुई धारा पर किया गया है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं हैं, जो इस जगह की सुंदरता पर चार चांद लगाते हुए नज़र आते हैं। ये मंदिर, कश्मीर के हिन्दू समुदाय की आस्था को बखूबी दर्शाता है।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरकश्मीरी पंडित
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