लाइव न्यूज़ :

सोशल मीडिया पर टीआरएफ का दुष्प्रचार गंभीर खतरा, एलजी मनोज सिन्हा बोले- खतरनाक है और ध्यान देना चाहिए

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: September 27, 2025 15:54 IST

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, उन्होंने कहा कि नागरिकों को भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

Open in App
ठळक मुद्देटीआरएफ के आनलाइन संदेशों का जमीनी स्तर पर सीधा असर पड़ता है और इसे नजरअंदाज करना खतरनाक होगा।आतंकवाद के कारण 40 हजार से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि पत्थरबाजी अब इतिहास बन गई है।

जम्मूः उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को चेतावनी दी कि अगर सोशल मीडिया पर आतंकवादी प्रतिरोध मोर्चा (टीआरएफ) द्वारा फैलाई जा रही बातों पर लगाम नहीं लगाई गई तो यह एक गंभीर खतरा बन सकती है। श्रीनगर के टैगोर हाल में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, उपराज्यपाल सिन्हा ने जम्मू कश्मीर के लोगों से शांति और स्थिरता की रक्षा के लिए आतंकवादी दुष्प्रचार के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि टीआरएफ के आनलाइन संदेशों का जमीनी स्तर पर सीधा असर पड़ता है और इसे नजरअंदाज करना खतरनाक होगा।

उन्होंने कहा कि अगर टीआरएफ के सोशल मीडिया पर इस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं और हम चुप रहते हैं, तो यह खतरनाक है। हमें इस पर ध्यान देना चाहिए। इस बात पर जोर देते हुए कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, उन्होंने कहा कि नागरिकों को भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कारण 40 हजार से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। इसे न सिर्फ सुरक्षा बलों द्वारा, बल्कि नागरिकों द्वारा भी पूरी तरह से जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए लोगों को आगे आना होगा। जम्मू कश्मीर में आए बदलाव पर प्रकाश डालते हुए, उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि पत्थरबाजी अब इतिहास बन गई है।

स्थानीय स्तर पर आतंकवादियों की भर्ती में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि जब भी किसी परिवार में फूट पड़ती है, तो हमें अपने घर को व्यवस्थित करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद हुए बदलाव जम्मू कश्मीर की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देना और वन अधिकार अधिनियम को लागू करना सरकार की न्याय और समावेशिता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब पहाड़ी समुदाय को समान अधिकार दिए जा रहे हैं। इस समुदाय को कोई नहीं रोक सकता। उनका जो अधिकार है, वह उन्हें दिया जाएगा।

उपराज्यपाल ने आगे कहा कि देश भर में, खासकर पूर्वाेत्तर में, आतंकवाद और वामपंथी उग्रवाद में उल्लेखनीय कमी आई है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलवाद का भी जल्द ही सफाया हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर लंबे समय से पीड़ित रहा है। आतंकवाद का अंत जरूरी है। सुरक्षा एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और हमें नागरिकों के रूप में जिम्मेदारी से पेश आना चाहिए और किसी भी गलत गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए।

टॅग्स :मनोज सिन्हाजम्मू कश्मीरआतंकवादी
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारदर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

कारोबारईरान में फिर से फंसे सैकड़ों कश्मीरी छात्र?, 7 दिन के लिए बंद अजरबैजान सीमा

भारतगंदरबल एनकाउंटर: 7 दिन में रिपोर्ट पेश करो?, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर लिखा

भारतअमरनाथ यात्रा पर पहलगाम नरसंहार की परछाई?, सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता, 29 जून को पूजा और 17 जुलाई से शुरू?

भारतJammu-Kashmir: पाक की ओर से जम्मू सीमा पर गोलीबारी, भारतीय रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट पर हमले की कोशिश नाकाम

भारत अधिक खबरें

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

भारतउत्तर प्रदेश उपचुनाव 2026ः घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर पड़ेंगे वोट?, 2027 विस चुनाव से पहले सेमीफाइनल, सीएम योगी-अखिलेश यादव में टक्कर?

भारतTamil Nadu Polls: बीजेपी कैंडिडेट्स की लिस्ट में अन्नामलाई का नाम नहीं, 'सिंघम' किए गए साइडलाइन या नई जिम्मेदारी की तैयारी