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जम्मू-कश्मीरः पूरी तरह से बंट गई पीपुल्स कांफ्रेंस, एक राजनीति में तो दूसरी हुर्रियत के खेमे में

By सुरेश डुग्गर | Updated: January 30, 2019 18:09 IST

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस वर्ष 2004 में दो गुटों में बंट गई थी। एक गुट जिसका नेतृत्व सज्जाद गनी लोन कर रहे थे, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस सज्जाद बन गई और दूसरा गुट जिसका नेतृत्व सज्जाद गनी लोन के बड़े भाई बिलाल गनी लोन कर रहे थे, बिलाल गुट कहलाई।

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कश्मीर में बुधवार को एक महत्वपूर्ण सियासी घटनाक्रम के बीच पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का अलगववादी स्वरूप और हुर्रियत में उसकी मौजूदगी समाप्त हो गई। हुर्रियत में शामिल पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के गुट को अब जम्मू कश्मीर पीपुल्स इंडिपिेंडेट मूवमेंट के नाम से जाना जाएगा। यह एलान हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी गुट के चेयरमैन मीरवाईज मौलवी उमर फारुक ने हुर्रियत मुख्यालय में किया।

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस वर्ष 2004 में दो गुटों में बंट गई थी। एक गुट जिसका नेतृत्व सज्जाद गनी लोन कर रहे थे, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस सज्जाद बन गई और दूसरा गुट जिसका नेतृत्व सज्जाद गनी लोन के बड़े भाई बिलाल गनी लोन कर रहे थे, बिलाल गुट कहलाई। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के घटक दलों में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस एक अहम घटक है और बिलाल गनी लोन उसकी स्थायी कार्यकारी समिति के सदस्य हैं।

सज्जाद गनी लोन ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से करीब 14 साल पहले ही किनारा कर लिया था। लेकिन वह वर्ष 2008 तक अलगाववादी सियासत में सक्रिय रहे और उसके बाद मुख्यधारा की सियासत में शामिल हो गए थे। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का बिलाल गुट हुर्रियत के साथ ही रहा और हमेशा कश्मीर में आजादी व जनमत संग्रह की वकालत करता आया है।

सज्जाद गनी लोन और बिलाल गनी लोन में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पर अपना दावा जताने की जंग वर्ष 2014 में उस समय तेज हुई, जब सज्जाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने बड़े भाई जैसा बताते हुए संकेत दिया था कि वह भाजपा के साथ जाने वाले हैं। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के बैनर तले ही हिस्सा लिया और वह दो सीटों पर जीते। गत मंगलवार को भारतीय चुनाव आयोग ने सज्जाद गनी लोन की पार्टी को सेब का चुनाव निशान भी दे दिया।

इस बीच अलगाववाद का रास्ता छोड़ राजनीति की मुख्य धारा में शामिल हुए राजनेता सज्जाद गनी लोन की पार्टी जम्मू कश्मीर में ‘सेब’ चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी। लोन ने ट्विटर पर इसकी घोषणा करते हुए कहा, “सेब जेकेपीसी का चुनाव चिन्ह होगा। आर्थिक शक्ति का एक प्रतीक... ।”

जम्मू कश्मीर के पूर्व मंत्री ने पार्टी नेताओं और पूर्व विधायक मोहम्मद अब्बास वानी को पार्टी के चुनाव चिन्ह के तौर पर “सेब” का सुझाव देने के लिये शुक्रिया कहा। लोन ने कहा, “मैं गुलमर्ग के पूर्व विधायक अब्बास वानी को शुक्रिया कहता हूं। उन्होंने सेब को पार्टी का चुनाव चिन्ह बनाने का विचार दिया। उनका विचार था कि हमारे चुनाव चिन्ह को आर्थिक शक्ति के तौर पर दिखना चाहिए।”

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने 2014 में जम्मू कश्मीर में हुए चुनाव में विधानसभा की दो सीटें जीती थीं। पिछले साल नवंबर से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के कई असंतुष्ट नेता इसमें शामिल हो चुके हैं। लोन अपनी पार्टी को पीडीपी और नेकां के विकल्प के तौर पर पेश करते हैं।

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