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इस्माइल साबरी याकूब : डांवाडोल अर्थव्यवस्था और महामारी से बेहाल मलेशिया के नये प्रधानमंत्री

By भाषा | Updated: August 22, 2021 13:46 IST

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भारी राजनीतिक सरगर्मियों के बीच मलेशिया में सत्ता ने एक बार फिर करवट बदली है। कोरोना काल में एक डांवाडोल अर्थव्यवस्था वाले देश के प्रधानमंत्री के तौर पर इस्माइल साबरी याकूब ने शाही महल में सुलतान अब्दुल्ला सुलतान अहमद शाह के सामने पद की शपथ ली तो समस्याओं से जूझते मलेशिया को संकट से उबारने की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर ले ली, हालांकि इसमें दो राय नहीं कि यह काम आसान नहीं होगा।केवल 40 दिन तक उप प्रधानमंत्री के पद पर रहने वाले याकूब के प्रधानमंत्री बनने से देश में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली पार्टी एक बार फिर सत्ता में लौट आई है। हालांकि उन्हें मलेशिया के ध्रुवीकृत समाज को एक सूत्र में बांधना होगा और महामारी के कारण बिगड़ते हालात में हाथों से फिसलती अर्थव्यवस्था की डोर को भी मजबूती से थामना होगा। राजनीतिक जानकार यह मानते हैं कि 61 वर्षीय याकूब को देश की जनता का खोया हुआ विश्वास दोबारा हासिल करने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी। पिछली सरकारों की अस्थिर नीतियों और महामारी से निपटने में नाकामी ने उनके काम को और भी मुश्किल बना दिया है। मलेशिया में महंगाई दर दुनिया में सबसे ज्यादा है और कोरोना के दौरान सात माह के आपातकाल और लॉकडाउन के बावजूद मौतों का आंकड़ा आसमान छू रहा है। 18 जनवरी 1960 को मलेशिया के तेमेरलोह, पहांग में जन्में इस्माइल साबरी बिन याकूब मलेशिया के नौवें प्रधानमंत्री हैं और इससे पहले वह देश के 13वें उप प्रधानमंत्री थे। वह सबसे कम समय तक, तकरीबन 40 दिन, उप प्रधानमंत्री रहे। इससे पहले वह पूर्व प्रधानमंत्री मुहिद्दीन यासीन मंत्रिमंडल में मार्च 2020 से रक्षा मंत्री का दायित्व संभाल रहे थे। उनके प्रारंभिक जीवन की बात करें तो उन्होंने 1967 में अपनी स्कूली शिक्षा शुरू की और यूनीवर्सिटी ऑफ मलाया से कानून में स्नातक स्तर की पढ़ाई की। उन्होंने 1985 में वकील के तौर पर अपने करियर की शुरूआत की ओर 1987 में तेमेरलोह जिला परिषद के सदस्य बने। 1996 में वह तेमेरलोह नगर परिषद के सदस्य बने। इस दौरान उन्हें संस्कृति, कला और पर्यटन मंत्री का राजनीतिक सचिव बनाया गया। यह सत्ता से उनका पहला करीबी त्तारूफ था। 2004 में संसद सदस्य बनने से पहले वह देश के कई प्रमुख बोर्ड के निदेशक और अध्यक्ष पद के अलावा सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। 2008 में वह एक बार फिर चुनाव जीते और इस बार उन्हें प्रधानमंत्री अब्दुल्लाह बदावी की सरकार में युवा और खेल मामलों का मंत्री बनाया गया। 2009 में नये प्रधानमंत्री नजीब रजक ने उन्हें घरेलू व्यापार, सहकारिता और उपभोक्ता मामलों का मंत्री बनाया। वह 2013 तक इस पद पर रहे। इसी साल हुए संसदीय चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और कृषि मंत्री नियुक्त किए गए। इसी तरह कदम दर कदम चलते याकूब आज मलेशिया के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए हैं। वह संकट से घिरे मलेशिया को फिर से पटरी पर ला पाएंगे या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन तीन साल पहले जिसे पार्टी को मलेशिया की जनता ने सत्ता से निकाल बाहर किया था उसी पार्टी के प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करनी होगी। सही नीतियां बनाकर जनता का विश्वास जीतना होगा और अपने आलोचकों की चुनौतियों का जवाब देते हुए अपने समर्थकों के विश्वास पर खरा उतरना होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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