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नए जमाने की जंग के तरीके सीखेंगे भारतीय सेना के अधिकारी, 23 सितंबर से नया पाठ्यक्रम शुरू होगा, वरिष्ठ कमांडर भी लेंगे हिस्सा

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: September 20, 2024 15:53 IST

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि 23 सितंबर से पहली बार भविष्य के युद्ध पर आधारित पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है। इसमें विभिन्न रैंक के अधिकारी भाग लेंगे।

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ठळक मुद्देभविष्य के युद्ध पर आधारित पाठ्यक्रम पर चर्चा हुईभारत शक्ति रक्षा सम्मेलन में डीएस जनरल अनिल चौहान ने दी जानकारी 23 सितंबर से पहली बार भविष्य के युद्ध पर आधारित पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है

नई दिल्ली:  दुनिया भर में युद्ध के तौर तरीके बदल रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना भी अपने अधिकारियों को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार करने पर जोर दे रही है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि 23 सितंबर से पहली बार भविष्य के युद्ध पर आधारित पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है। इसमें विभिन्न रैंक के अधिकारी भाग लेंगे। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भारत शक्ति रक्षा सम्मेलन में एक संवाद सत्र में ये जानकारी दी। उन्होंने  संयुक्त थिएटर कमांड की व्यापक रूपरेखा के बारे में भी बात की।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने कहा, "हमने इस बात पर चर्चा की कि युद्ध किस तरह विकसित हो रहा है और हमें इसके लिए क्या करने की जरूरत है, और मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण है। इसमें हमने भविष्य के युद्ध पर आधारित पाठ्यक्रम पर चर्चा की, जो चार दिन बाद 23 (सितंबर) को शुरू होने जा रहा है, यह पहला पाठ्यक्रम है, जिसे हम तैयार कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि यह नियमित पाठ्यक्रम से थोड़ा अलग है, जहां समान रैंक के अधिकारी एक पाठ्यक्रम में भाग लेते हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि आप मेजर से लेकर मेजर जनरल तक के रैंक के अधिकारियों को इस विशेष कोर्स में भाग लेते देखेंगे। यह कुछ नया है जो हम करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक मेजर जनरल शायद मेजर से कुछ सीख सकता है और एक मेजर मेजर जनरल से रणनीति और संचालन सीख सकता है। यह शुरुआती पाठ्यक्रम है और शायद यह  परिपक्व हो जाएगा। जनरल चौहान ने कहा कि जब हम भविष्य के युद्ध को देख रहे हैं, तो हम यह नहीं देख रहे हैं कि भविष्य में अग्रिम सेनाएँ कैसे लड़ने जा रही हैं और फिर बाकी उनकी नकल करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हम यह सीखने जा रहे हैं कि हम भविष्य में कैसे लड़ेंगे।  हम कैसे रोडमैप तैयार करेंगे। इसलिए, यह एक अलग अवधारणा है।

बता दें कि बीते कुछ सालों में हुए आर्मेनिया-अजरबैजान युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और इसरायल-हमास युद्ध को भारतीय सेना ने बारीकी से समझा है। इन युद्धों में कई गैर-परंपरागत तरीके अपनाए गए। ड्रोन का इस्तेमाल जमकर हुआ। पाकिस्तान और चीन से दोहरे मोर्चे पर चुनौती देखते हुए भारतीय सेना न सिर्फ नए हथियार अपने जखीरे में शामिल कर रही है बल्कि सैनिकों और अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग भी दे रही है।

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