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इंडोनेशिया में कोविड-19 टीकाकरण बाधित होने के कारण संक्रमण को लेकर बढ़ी चिंता

By भाषा | Updated: November 26, 2021 13:46 IST

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जकार्ता, 26 नवंबर (एपी) इंडोनेशिया इस साल के मध्य में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में हुई बढ़ोतरी और बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने के बाद काफी हद तक उबर चुका है, लेकिन विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने साजो-सामान संबंधी चुनौतियों और अन्य समस्याओं के कारण कोविड-19 टीकाकरण बाधित होने और छुट्टियां निकट आने के मद्देनजर देश में संक्रमण की लहर फिर से आने को लेकर चिंता व्यक्त की है।

इंडोनेशिया में अन्य दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों से पहले ही 13 जनवरी को टीकाकरण शुरू हो गया था और जुलाई एवं अगस्त में संक्रमण और मृत्युदर बढ़ने के मद्देनजर उसने अपना टीकाकरण अभियान और तेज कर दिया था और प्रतिदिन 10 लाख से अधिक टीके लगाए गए, लेकिन दुनिया के चौथे सबसे अधिक आबादी वाले देश को इस वायरस से निपटने के लिए अभी लंबी दूरी तय करनी है।

वैज्ञानिक ऑनलाइन प्रकाशक ‘आर वर्ल्ड इन डेटा’ के अनुसार, देश में अभी तक केवल 33 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनका पूर्ण टीकाकरण हो चुका है और 16 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनका आंशिक टीकाकरण हुआ है, जबकि उसके पड़ोसी मलेशिया में 76 प्रतिशत लोगों का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है।

इंडोनेशियाई महामारी वैज्ञानिक एवं सरकार के अकादमिक सलाहकार डिकी बुडिमन ने कहा कि द्वीपसमूह देश में अधिकतर टीकाकरण जावा और बाली जैसे बड़े द्वीपों के शहरी क्षेत्रों में हुआ है, जबकि कई छोटे, ग्रामीण द्वीपों में कम टीकाकरण हुआ है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियां कमजोर हैं और बुजुर्गों की संख्या अधिक है।

उन्होंने कहा कि लोग छुट्टियों में इन स्थलों पर जाते हैं, इसलिए वायरस के फैलने का खतरा है। उन्होंने कहा इंडोनशिया ने अपना टीकाकरण कार्यक्रम शीघ्र शुरू कर दिया था, इसलिए टीकों का प्रभाव कम हो रहा है।

सरकार ने लोगों से यात्रा नहीं करने की अपील की है तथा क्रिसमस और नववर्ष पर सभी प्रांतों में प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं, लेकिन करीब दो करोड़ लोगों की जावा और बाली जाने की योजना है।

बुडिमन ने सरकार को टीकाकरण कार्यक्रम तेज करने की सलाह दी।

सुमात्रा द्वीप के उत्तर-पश्चिमी सिरे पर आचे प्रांत में इंडोनेशियाई मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख सफरीजल रहमान ने कहा कि अधिकारियों को टीकाकरण कार्यक्रम तेज करने में स्थानीय धार्मिक नेताओं की मदद लेनी चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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